आंधी बारिश से शहर से सटे सोखना विद्युत उपकेंद्र की 33 हजार केवीए की लाइन के 12 खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। इसके साथ लाइन जमीन पर आ गई। लाइन क्षतिग्रस्त होने के चलते सोखना, रतनगढ़ी, मेंडू, कुंडा सीर, अमरपुर, किंदौली सहित 15 गांवों में बिजली संकट गहरा गया ।
बुधवार की रात आई आंधी बारिश से जिले का बिजली सिस्टम लड़खड़ा गया। इस कारण कई गांवों में बृहस्पतिवार की देर शाम तक बिजली का ब्लैक आउट हो गया। किंदौली के निकट 33 हजार केवीए की लाइन के 12 खंभे टूटने के चलते करीब पंद्रह गांवों में बिजली गुल हो गई है।। बिना बिजली के लोगो को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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मौसम हर रोज करवट बदल रहा है। कभी आंधी तो कभी बारिश आ रही है। इस कारण लोगों को निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। देर रात आई आंधी बारिश से शहर से सटे सोखना विद्युत उपकेंद्र की 33 हजार केवीए की लाइन के 12 खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। इसके साथ लाइन जमीन पर आ गई। लाइन क्षतिग्रस्त होने के चलते सोखना, रतनगढ़ी, मेंडू, कुंडा सीर, अमरपुर, किंदौली सहित 15 गांवों में बिजली संकट गहरा गया ।
रात आठ बजे से बृहस्पतिवार की शाम साढ़े सात बजे तक बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं हुई। इस कारण लोग बिना बिजली के कामकाज नहीं कर सके। लोगों को पीने के पानी तक के लिए इधर उधर भटकना पड़ा। देर रात तक लोग बिजली आने का इंतजार करते रहे। उपखंड अधिकारी विपिन गुप्ता का कहना है कि आंधी बारिश में सोखना विद्युत उपकेंद्र की लाइन के 12 खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। इस कारण आपूर्ति बाधित है। सुचारु करने के प्रयास जारी हैं।
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सत्यापन में देरी से खंभे बदलने में बाधा
आंधी-बारिश के दौरान जब किसी स्थान पर बिजली की लाइन और खंभे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो एसडीएम द्वारा सत्यापन किया जाता है। उसके बाद स्टोर से पोल आदि उठाने की प्रक्रिया की जाती है। बुधवार की रात को आई आंधी के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सत्यापन के काम में देरी लगाई। इस कारण भी क्षतिग्रस्त खंभों को बदलने का काम देरी से शुरू हो सका। इस कारण लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ा।