जिले में करीब 709 करोड़ रुपये की लागत से संचालित आठ प्रमुख निर्माण परियोजनाओं को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी सख्त कर दी है। डीएम अतुल वत्स ने इन परियोजनाओं के लिए अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर दिया है।
डीएम ने बताया कि सभी नामित अधिकारियों को प्रत्येक माह निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का सत्यापन करना होगा और फोटोग्राफ सहित निरीक्षण रिपोर्ट जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में उपलब्ध करानी होगी।
जिले में 24.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन कंपोजिट विद्यालय बर्द्धवारी, 184.94 करोड़ रुपये की नवीन 1026 कैदी की क्षमता वाले जिला कारागार, हाथरस एवं सहपऊ ब्लॉक में 3.19-3.19 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, 128.91 करोड़ रुपये की हाथरस सीवरेज योजना पर काम चल रहा है।
इसके अलावा 322.31 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स (44 कोर्ट), सिकंदराराऊ के मऊ चिरायल में 24.20 करोड़ रुपये की आश्रम पद्धति विद्यालय परियोजना और 17.98 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट भी निर्माणाधीन है। इन सभी की निगरानी की जाएगी।
इन परियोजनाओं के लिए मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), जिला विकास अधिकारी तथा परियोजना निदेशक (डीआरडीए) सहित वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करने और किसी भी प्रकार की बाधा आने पर उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निर्धारित मानकों के अनुपालन और भौतिक प्रगति का भी परीक्षण किया जाएगा। प्रत्येक माह निरीक्षण आख्या फोटोग्राफ के साथ उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, ताकि परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग हो सके और किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।