उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के हाथरस डिपो की कार्यशाला में बृहस्पतिवार को उस समय कामकाज पूरी तरह ठप हो गया, जब आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारियों ने चार माह से वेतन न मिलने के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी। इस कारण कई बसें बिना नियमित मरम्मत व तकनीकी जांच के ही कार्यशाला से बाहर निकाल दी गईं।
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें ठेका कंपनी के माध्यम से मात्र सात से नौ हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है, जो पहले से ही बेहद कम है। उसका भी पिछले चार महीनों से भुगतान नहीं किया गया है।
आर्थिक तंगी के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, जिससे मजबूर होकर उन्हें कार्य बहिष्कार करना पड़ा। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ठेका कंपनी श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन कर रही है। ईएसआई, पीएफ सहित अन्य श्रमिक सुविधाएं भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
उनका कहना है कि करीब 10 माह पहले भी इसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। उस समय अधिकारियों और ठेका कंपनी की ओर से समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कार्यशाला में काम बंद होने के कारण बसों की नियमित सर्विसिंग, मैकेनिकल जांच और आवश्यक मरम्मत प्रभावित हुई। इससे रोडवेज अधिकारियों के सामने परिचालन व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई। डिपो के स्थानीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों से वार्ता की और उन्हें काम पर लौटने के लिए समझाने का प्रयास किया।
ठेका कंपनी के अधिकारियों से भी संपर्क कर शीघ्र भुगतान कराने की बात कही गई। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनका बकाया वेतन नहीं मिलेगा और अन्य लंबित मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए बिना पूरी तकनीकी जांच के बसों का संचालन भी चिंता का विषय बना हुआ है।
चार महीने से वेतन नहीं मिला है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। मजबूर होकर हड़ताल करनी पड़ रही है।
-अरविंद कुमार, ठेका कर्मी।
हमें सात-आठ हजार रुपये महीने वेतन मिलता है। इतना कम वेतन भी समय पर नहीं दिया जाता। महंगाई के इस दौर में परिवार पालना बहुत मुश्किल हो गया है।
-रामकुमार, ठेका कर्मी।
ईएसआई और पीएफ जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। पिछले आंदोलन में जो वादे किए गए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए। अब और मनमानी नहीं सह सकते।
-नरेंद्र सिंह, ठेका कर्मी।
दरअसल कार्यशाला का स्टाफ अलीगढ़ सेवा प्रबंधक के अधीन आता है। हमने उनसे इनके वेतन के संबंध में बात की है। इनका वेतन बहुत जल्द ही खातों में पहुंचने की बात कही गई है। हम इन्हें समझाकर काम पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
-मंगेश कुमार, प्रभारी, हाथरस डिपो।