6.50 करोड़ रुपये से होगा कायाकल्प
नगर पालिका 6.50 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट से शहर में एक आधुनिक ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करेगी। नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य शहर के गंदे पानी की निकासी को सुव्यवस्थित करना और बारिश के दौरान होने वाले जलभराव को रोकना है। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में नगर पालिका व जल निगम ने संयुक्त रूप से काम शुरू कर दिया है। जल निगम ने ग्रेडिएंट सर्वे शुरू कर दिया है। इसमें पाइप से पानी निकलने की दर का आंकलन करते हुए सही ढलान का पता किया जाएगा, जिससे पानी के प्रवाह में कोई दिक्कत न आए।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने की योजना
पानी की निकासी के लिए शहर में उपयुक्त जगह केवल जलेसर रोड ही है। शहर के एक तरफ रेलवे लाइन है और दो तरफ नेशनल हाईवे है। इसलिए केवल सीवेज फार्म की जगह बचती है। पूरे शहर के ढलान को जलसेर रोड की तरफ ही रखा जाएगा। इसी तरह अंडरग्राउंड पाइप लाइन बिछाई जाएगी।
ट्रीटमेंट प्लांट पर हो रहे 122 करोड़ रुपये खर्च
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत नगर पालिका के सीवेज फार्म की जगह पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। इस पर सरकार लगभग 122 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। 62 करोड़ रुपये इसके निर्माण में खर्च किए जा रहे हैं, जबकि लगभग 60 करोड़ रुपये 15 साल तक इसके संचालन के लिए संबंधित कंपनी को दिए जाएंगे। ड्रेनेज के साथ-साथ शहर के सीवेज का ढलान भी इसी ओर रखा जाएगा।
शहर में ग्रेडिएंट सर्वे (ढाल का आकलन) इसलिए जरूरी
- यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी का बहाव बिना किसी पंपिंग के प्राकृतिक रूप से एसटीपी की ओर रहे।
- पुराने और बंद हो चुके ड्रेनेज पॉइंट्स की पहचान कर उन्हें नए सिस्टम में जोड़ा जा सके।
- आगामी 50 वर्षों की आबादी और पानी की निकासी की जरूरतों को ध्यान में रखा जा सके।