जिले में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने और अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस उच्च तकनीक वाले अभियान के तहत कुल 11,301 चिह्नित अपराधियों और 782 हिस्ट्रीशीटरों पर पैनी नजर रखी जा रही है। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए यक्ष एप के जरिये हर सप्ताह इनकी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पूरे जिले को 562 बीटों में बांटा गया है। प्रत्येक बीट में एक बीट सिपाही की जवाबदेही तय की गई है। इस नई व्यवस्था में बीट सिपाही खुद अपराधियों के घर पहुंच रहे हैं। वे मौके पर जाकर अपराधी की नवीनतम तस्वीर खींच रहे हैं। साथ ही, यक्ष एप पर उनके घर के सटीक भू-निर्देशांक अपलोड कर रहे हैं। इससे पुलिस का सत्यापन कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर हो रहा है।
यक्ष एप के जरिये चलाए जा रहे इस विशेष स्क्रीनिंग अभियान में कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस सत्यापन में पता चला है कि सूची में दर्ज 22 हिस्ट्रीशीटरों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, लंबे समय से शांत और सुधर चुके 12 अपराधियों की हिस्ट्रीशीट विधिवत बंद कर दी गई है। बाकी मृत या निष्क्रिय अपराधियों की फाइलें बंद करने की विधिक प्रक्रिया जारी है।
बीट सिपाही की जवाबदेही
पुलिस प्रशासन ने इस व्यवस्था को बेहद सख्त बनाया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि यक्ष एप की निगरानी सूची में शामिल किसी अपराधी ने कोई नई आपराधिक वारदात की। तो संबंधित क्षेत्र का बीट सिपाही सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा।
इनका कहना है
यक्ष एप के जरिए अपराधियों की हर सप्ताह निगरानी की जा रही है। उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इससे काफी हद तक अपराध पर नियंत्रण लिया जा रहा है। इस तकनीकी पहल से जहां एक तरफ पुलिस के पास हर अपराधी का सटीक और रियल-टाइम डेटा उपलब्ध रहेगा, वहीं दूसरी तरफ नियमित और सीधी दस्तक से अपराधी काबू में रहेंगे।
चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी