पानी और कीचड़ से राह चलना मुश्किल
कई साल के संघर्ष के बाद गांव में पानी की टंकी मंजूर हुई थी, लेकिन अब सड़कों पर बहता पानी मुसीबत बन गया है। बच्चे स्कूल जाते समय कीचड़ में फिसलकर गिर रहे हैं। हर सप्ताह पाइपलाइन लीकेज होना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। - श्रीमती देवी, स्थानीय निवासी, नगला मया।
मरम्मत के नाम पर हो रही खानापूरी
विभागीय कर्मचारी गड्ढा खोदकर काम चलाऊ मरम्मत कर देते हैं। दो दिन बाद पानी का प्रेशर बढ़ते ही पाइपलाइन फिर टूट जाती है। इससे सरकारी बजट की बर्बादी हो रही है। पूरी लाइन दुरुस्त होने पर ही समस्या का स्थायी समाधान संभव है। - नीरज कुमार, स्थानीय निवासी, नगला मया।
जांच कराकर डाली जाए नई पाइपलाइन
राजनगर और महासिंहपुर को पानी देने पर ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका खामियाजा नगला मया के लोग भुगत रहे हैं। बार-बार पाइप फटना घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका पैदा करता है। उच्चाधिकारी मौके पर जांच कराकर नई लाइन डलवाएं। - पुष्पेंद्र कुमार, स्थानीय निवासी, नगला मया
जब नई टंकी बनाई जाती है तब, करीब छह माह तक उसकी टेस्टिंग आदि की जाती है। अक्सर प्रेशर के कारण लाइन लीकेज करने लगती है, पाइप फट जाते हैं। नगला मया के बारे में अब हम जानकारी करते हैं। हम पूरी तरह पाइपलाइन को ठेकेदार से सही कराएंगे, इसे लेकर मौका मुआयना भी किया जाएगा। - मोहित कुमार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण, जल निगम, हाथरस।