किसान की मौत पर भदामई में विलाप करते परिजन।
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हाथरस। प्राकृतिक आपदा और सूखे से तबाह किसान को बैंक का वसूली नोटिस मिला तो उसका सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाया, जिससे उसकी तबियत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें उपचार के लिए आगरा ले जाने के प्रयास किए, लेकिन किसान ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
किसान के पुत्र दानवीर की मानें तो उसके करीब 65 वर्षीय पिता मान सिंह ने एक राष्ट्रीयकृत बैंक से करीब तीन लाख रुपये का केसीसी के माध्यम से कर्जा लिया था। लगातार दो फसल सूखा और आपदा से नष्ट होने के कारण वह केसीसी के रूप में लिए गए इस कर्ज को जमा नहीं कर पा रहे थे। यह पैसा जमा नहीं होने से ब्याज और अन्य खर्चाें को मिलाकर बैंक ने चार लाख रुपये का कर्ज किसान पर होने का दावा किया, क्योंकि किसान को इस रबी की फसल में कोई लाभ नहीं हुआ और नई फसल के लिए भी उसे निजी कर्जा लेना पड़ा था। किसान यह कर्जा नहीं चुका पा रहा था, जबकि कर्जदार पहले से ही उस पर कर्जा वापस करने के लिए दवाब बना रहे थे। परिजनों के मुताबिक इस दौरान बैंक ने भी चार लाख रुपये शीघ्र जमा करने का नोटिस किसान को भेज दिया।
किसान के पुत्र के मुताबिक इससे उसके पिता सदमे में आ गए। दो दिन पूर्व उन्हें पसीना आने के साथ ही तेज घबराहट हुई। परिजन उन्हें निजी चिकित्सक के पास लेकर गए। यहां से उन्हें आगरा ले जाया रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
-किसान की मौत के मामले की जांच कराएंगे। सदमे से किसान की मौत की पुष्टि होने पर विधिवत रूप से कार्रवाई की जाएगी।
-अविनाशकृष्ण सिंह, डीएम हाथरस