पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल की गिरफ्तारी का शनिवार को पूरे दिन हल्ला मचा। पूर्व विधायक के शुभचिंतक और विरोधी इस बारे में जानकारी करने के लिए तत्काल ही सक्रिय हो गए। पूर्व विधायक कीगिरफ्तारी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी होने लगीं।
हुआ यूं था कि पूर्व विधायक के खिलाफ सहपऊ थाने में धोखाधड़ी और अन्य आरोप लगाकर वर्ष 2008 में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उसमें पूर्व विधायक के अलावा आपूर्ति विभाग के अधिकारी भी आरोपित किए गए थे। इसमें मुख्य रूप से यह आरोप था कि पूर्व विधायक ने देवेंद्र की जगह मुकेश नाम से पेटी डीलर का लाइसेंस ले लिया है। पूर्व विधायक का यह तर्क था कि उनका नाम देवेंद्र उर्फ मुकेश है। रिपोर्ट में अन्य आरोप भी लगे थे। यह मामला फिलहाल एंटी करप्शन कोर्ट मेरठ में चल रहा था।
शनिवार को इसकी सुनवाई थी। ऐसे में मेरठ से ही खबर आई कि पूर्व विधायक को कोर्ट में अपनी कस्टडी में ले लिया है और उन पर मिलावटखोरी का आरोप है। बाद में यह भी चर्चा रही कि पूर्व विधायक ने इस मामले में शपथपत्र देकर कुछ दिनों की मोहलत कोर्ट से ले ली है। यही नहीं कोर्ट से बाहर पुलिसकर्मियों के साथ फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस बारे में जब पूर्व विधायक के पूछा गया तो उनका कहना था कि एक केस में उनकी तारीख थी और वह तारीख करने गए थे। उनके विरोधी बिना वजह की अफवाहें फैला रहे हैं।
कोर्ट ने दी सपा के पूर्व विधायक को मोहलत
मेरठ। समाजवादी पार्टी के हाथरस के पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार अग्रवाल उर्फ मुकेश कुमार को भ्रष्टाचार के एक मामले में स्पेशल जज एंटी करप्शन द्वितीय मनजीत सिंह श्यौरान ने आगामी 20 नवंबर तक अदालत में उच्च न्यायालय के आदेश के साथ पेश होने के लिए मोहलत दी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार हाथरस के पूर्व विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार का मामला विचाराधीन चल रहा है। जिसमें पूर्व विधायक के पास इलाहाबाद उच्च न्यायालय का 11 अगस्त 2016 का हाईकोर्ट द्वारा उत्पीड़नात्मक कार्यवाही न करने का आदेश प्राप्त था। लेकिन वह तब से चला आ रहा था। जिसके आधार पर पूर्व विधायक अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे थे।
शनिवार को पूर्व विधायक अपने अधिवक्ता के साथ अदालत में पहुंचे, क्योंकि अन्य आरोपी के खिलाफ कार्यवाही चल रही थी। जिस पर पूर्व विधायक के अदालत में पेश होने पर अदालत ने पूर्व विधायक को न्यायिक हिरासत में ले लिया। जिस पर पूर्व विधायक की तरफ से कहा गया कि उनके पास उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त है। अदालत ने इस मामले में सुनवाई करने के बाद पूर्व विधायक से उच्च न्यायालय का वर्तमान आदेश अदालत दाखिल करने के साथ पेश होने का शपथपत्र व प्रार्थना पत्र मांगा जिस पर पूर्व विधायक की तरफ से दिए गए शपथपत्र पर अदालत ने आगामी 20 नवंबर की तिथि नियत कर दी है।
दूसरे आरोपी सत्यार्थी के अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय जो तत्कालीन महामाया नगर की जिला पंचायत अध्यक्ष थीं, उन्होंने पूर्व विधायक के खिलाफ मिट्टी के तेल का फर्जी लाइसेंस लेकर घोटाले का मामला दर्ज कराया था, जिसकी जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा आगरा ने कर आरोपी पूर्व विधायक सहित एक अन्य के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया। आरोपियों के खिलाफ धारा धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का मामला दर्ज किया गया। ब्यूरो