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जांच में 50 और फर्जी नलकूप कनेक्शन पकड़े

Sun, 01 May 2016 11:10 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
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हाथरस। भूजल स्तर में गिरावट की गंभीर समस्या से जूझ रहे जिले में नलकूप कनेक्शनों में बड़ा घोटाला सामने आया है। हाथरस जंक्शन क्षेत्र के आठ फर्जी नलकूप कनेक्शनों के खुलासे के बाद विद्युत अधिकारियों ने रविवार को छह टीमें बनाकर डार्क जोन के अन्य गांवों में भी नलकूप कनेक्शनों की सघन जांच कराई। यह सभी गांव सलेमपुर बिजलीघर क्षेत्र के हैं। अब तक की जांच में करीब 50 ऐसे फर्जी नलकूप कनेक्शनों का खुलासा हुआ है, जोकि डार्क जोन में नियमों को ताक पर रखकर फर्जी कागजों से जारी किए गए हैं। इन मामलों में देर रात बिजली अफसर संबंधित उपभोक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहे थे। इस मामले में उन बिजली अभियंताओं की भूमिका भी कटघरे में आ गई है, जिनके क्षेत्र में यह फर्जी नलकूप कनेक्शन चल रहे थे। इस बडे़ घोटाले के खुलासे ने बिजली महकमे में खलबली मचा दी है। अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई के डर से सहमे हुए हैं। 
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गौरतलब है कि डार्क जोन में आठ फर्जी नलकूप कनेक्शन देने के मामले में अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण खंड तृतीय के दो बाबुओं को निलंबित कर चुके हैं। जल्द ही कुछ और अभियंताओं व कर्मियों पर भी गाज गिरने की संभावना है। शासन के आदेश पर मुख्य अभियंता अलीगढ़ ने जिले के डार्क जोन में नलकूप कनेक्शनों की जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में हाथरस जंक्शन के गांव टिकारी में आठ ऐसे नलकूप कनेक्शन पकड़े गए, जोकि फर्जी कागजों से जारी किए गए थे। इन आठों उपभोक्ताओं पर कोतवाली हाथरस जंक्शन में रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा चुकी है। इस खुलासे के बाद मुख्य अभियंता के आदेश पर अधीक्षण अभियंता राकेश वर्मा ने डार्क जोन के अन्य नलकूप कनेक्शनों की जांच के लिए पांच टीमों का गठन किया। रविवार को इन टीमों ने हाथरस जंक्शन और सलेमपुर बिजलीघर क्षेत्र में नलकूप कनेक्शनों की सघन चेकिंग की। सबसे पहले यह टीम गांव टिकारी पहुंची। टीम में एसडीओ कुलदीप श्रीवास्तव, एसडीओ कायम सिंह, एसडीओ सिकंदराराऊ आरपी सिंह, जेई एसपी सिंह, प्रवेंद्र कुमार, अनिल कुमार शर्मा ने कोतवाली हाथरस जंक्शन की उपनिरीक्षक ज्योति पुलिस फोर्स के साथ थीं। टीम ने कई नलकूपों पर छापा मारकर उनकी लाइन और ट्रांसफॉर्मर की जांच की। उपभोक्ताओं के कनेक्शन संबंधित दस्तावेज भी चेक किए। भारी-भरकम अमले के साथ की गई कार्रवाई से गांव में दिन भर अफरा-तफरी और खलबली का माहौल रहा।
एसई राकेश वर्मा ने बताया कि इनके अलावा और भी टीमों ने सलेमपुर क्षेत्र में डार्क जोन के गांवों में नलकूप कनेक्शनों की जांच की। दिन भर में करीब 30-40 फर्जी कनेक्शन पकड़े गए हैं। हालांकि सूत्र बताते हैं कि फर्जी कनेक्शनों की संख्या 50 से ज्यादा है। एसई ने माना कि यह सभी कनेक्शन डार्क जोन के दायरे में आते हैं, जिससे स्पष्ट है कि नियमों के विपरीत यह कनेक्शन दिए गए हैं। इनका पूरा ब्योरा तैयार करके इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही थी। 
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करीब 30-40 कनेक्शन अब तक की जांच में पकड़े गए हैं। इनके बिल, किताब आदि की जांच से यह फर्जी मालूम होते हैं। जिस सलेमपुर क्षेत्र में यह कनेक्शन चल रहे हैं, वह डार्क जोन में ही है। एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
- राकेश वर्मा, अधीक्षण अभियंता हाथरस

बिना अफसरों के कैसे जारी हुए कनेक्शन?
डार्क जोन में फर्जी नलकूप कनेक्शनों के खुलासे ने कर्मियों के साथ उन अभियंताओं की भूमिका पर भी सवाल खड़ा कर दिया है, जिनके क्षेत्र में यह कनेक्शन जारी हुए। सवाल यह है कि क्या वाकई अभियंताओं की बिना जानकारी और उनके बिना दस्तखत के कोई कनेक्शन जारी हो सकता है। क्या बिना उनके हस्ताक्षरों के कनेक्शन से संबंधित बिल बुक, एस्टीमेट की रसीदें और पासबुक जारी हो सकती हैं। निश्चित रूप से इस घोटाले में उन अभियंताओं की भी मिलीभगत रही होगी, जिनके कार्यकाल में यह कनेक्शन जारी हुए हैं। टिकारी क्षेत्र में पकड़े गए आठ कनेक्शन चलाने वाले तो नलकूप बिल की किताब और प्राकलन की धनराशि जमा कराने की रसीद भी नहीं दिखा पाए। जो किताबें इन किसानों ने पेश कीं, वह भी फर्जी लग रही थीं।

स्टोर रूम से कैसे जारी हुआ सामान?
सवाल यह भी है कि बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए जारी हुए इन नलकूप कनेक्शनों के लिए सामान कैसे जारी कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि बिना प्रमाणित दस्तावेजों के स्टोर रूम से सामान की निकासी के लिए न तो कोई इंडेंट बन सकता है और न हीं जॉब कार्ड। सामान निकासी भी बिना संबंधित अभियंताओं के हस्ताक्षर के नहीं हो सकती। ऐसे में स्टोर रूम की भूमिका भी जांच के घेरे में आ रही है। 

कनेक्शन चलते रहे, किसी को भनक नहीं
उपभोक्ता लंबे समय से फर्जी कागजों पर जारी हुए कनेक्शनों से नलकूप चला रहे थे और बिजली अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। शिकायत के बाद जब जांच हुई, तब यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। हालांकि अधिकारियों की दलील है कि फर्जी पासबुक के आधार पर जमा धनराशि का समाशोधन कर्मियों ने विभागीय रिकॉर्ड में नहीं किया, जिससे यह कनेक्शन पकड़ में नहीं आ सके, लेकिन सवाल यह है कि अगर नियमित चेकिंग के दौरान इनके दस्तावेज सही से चेक क्यों नहीं किए गए।

रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर विवाद
चेकिंग के दौरान रविवार को पकड़े गए फर्जी नलकूप कनेक्शनों की रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर काफी देर तक विद्युत टीमों में विवाद की स्थिति रही। मुकदमा दर्ज कराने की जिम्मेदारी सभी एक-दूसरे पर टालते रहे। सलेमपुर बिजलीघर पर इसे लेकर इनके बीच नोक-झोंक और हंगामा होने की भी जानकारी मिली है। मामला उच्चाधिकारियों तक भी पहुंच गया, लेकिन अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार करते रहे।

किसानों ने लगाया फंसाने का आरोप
जिन किसानों के कनेक्शन कटघरे में आए हैं, उन्होंने रविवार की शाम को सलेमपुर बिजलीघर पर पहुंचकर हंगामा भी किया। इनका कहना था कि बिजली अफसर और कर्मी खुद को बचाने के लिए निर्दोष किसानों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। पूरा ठीकरा किसानों के सिर ही फोड़ा जा रहा है, जबकि कनेक्शन बिना अधिकारियों की मंजूरी के कैसे जारी हो सकते हैं।
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