आदित्य चौधरी खिलाड़ी। स्रोत : स्वयं
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सादाबाद तहसील के गांव कजरौठी निवासी आदित्य चौधरी ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर क्रिकेट के मैदान में जो मुकाम हासिल किया, वह क्षेत्र के युवाओं के लिए एक मिसाल है। हालांकि, कोरोना काल और बीमारी ने उनके बढ़ते कदमों को जरूर रोका, लेकिन खेल के प्रति उनका जज्बा कम नहीं हुआ है।
आदित्य खुद मैदान पर उतरकर गांव के उभरते खिलाड़ियों के भविष्य को संवारने में जुट गए हैं। आदित्य ने महज 13 साल की उम्र में क्रिकेट का बल्ला थाम लिया था। उन्होंने आगरा के राजपुर चुंगी स्थित जॉन मिल्टन पब्लिक स्कूल स्पोर्ट्स एकेडमी से क्रिकेट के गुर सीखे। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2017 में उनका चयन अंडर-16 स्कूल टीम में हुआ।
इस दौरान उन्होंने गोवा में शानदार प्रदर्शन कर सबको प्रभावित किया। इसके बाद 2018 में उन्होंने अपनी टीम की ओर से नेपाल में जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाई।आदित्य अब अपने गांव में युवाओं को क्रिकेट की बारीकियां सिखा रहे हैं। हालांकि, उन्हें इस बात का दुख है कि जिले में खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल मैदान और मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है।
उनका मानना है कि यदि प्रशासन और सरकार खेल सुविधाओं पर ध्यान दे, तो सादाबाद और हाथरस की मिट्टी से कई बड़े खिलाड़ी निकल सकते हैं। आदित्य का कहना है कि उनका सपना है कि सादाबाद से कोई ऐसी प्रतिभा निकले, जो देश के लिए खेले और हमारे जिले व गांव का नाम पूरे विश्व में रोशन करे।
कई टूर्नामेंट में मैन ऑफ द मैच रहे
शानदार फॉर्म में चल रहे आदित्य कई स्कूली टूर्नामेंटों में ''मैन ऑफ द मैच'' रहे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बीमारी के कारण उनका चयन अंडर-19 टीम में नहीं हो सका और इसी बीच कोरोना महामारी ने खेल गतिविधियों पर विराम लगा दिया। लंबे अंतराल के कारण उनका सक्रिय कॅरिअर प्रभावित हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।