संवाद न्यूज एजेंसी, सासनी।
कोरोना संक्रमण की रफ्तार बेशक थमती नजर आ रही है, लेकिन ग्रामीण अंचल में कोरोना का कहर कम नहीं हो रहा। संकमण के चलते क्षेत्र में 12 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इलाज के नाम पर केवल आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से दवाओं की किट वितरित कराई जा रही हैं।
इलाज की सुविधा झोलाछापों के भरोसे है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर ओपीडी बंद है। आपातकालीन सेवाओं के लिए लोग निजी डॉक्टरों के यहां पहुंच रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण अंचल में टीकाकरण का अभियान शुरू कर दिया है।
क्षेत्र में एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कस्बे में है। इसके अलावा बसईकाजी, कौमरी , खिटौली कटैलिया, सलेमपुर, टिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां से क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में प्रशासन द्वारा क्षेत्र में करीब 115 निगरानी समितियां बनाई गई हैं। यह समितियां गांव-गांव काम कर रही हैं। कोरोना महामारी के प्रथम चरण में क्षेत्र में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए थे।
इन्हें द्वितीय चरण में कोविड अस्पताल का नाम दिया गया है। हालांकि क्षेत्र में एक मात्र कोविड हॉस्पिटल बनाया गया है। वह भी निजी चिकित्सालय में संचालित है। ग्रामीण अंचल में आशा कार्यकर्ता और संगिनी को दवाओं की किट वितरण के लिए दी गई हैं।
प्रथमदृष्टया जिन लोगों को सर्दी, बुखार और जुकाम जैसे लक्षण हैं, उन्हें दवाओं की किट वितरित की जा रही हैं। हालांकि ग्रामीण अंचल में प्रशासन ने टीकाकरण की शुरुआत कर दी है। प्रशासन द्वारा सीएचसी सासनी पर कोविड एल वन हॉस्पिटल बनाया गया था। इसे एल टू अस्पताल का दर्जा दिया जाना था, लेकिन सुविधाओं के अभाव में प्रशासन ने हाथ पीछे खींच लिए।
- ग्रामीण अंचल में टीकाकरण का अभियान शुरू कर दिया गया है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से कोरोना किटों का वितरण कराया जा रहा है। शासन द्वारा प्रदत्त सभी सुविधाएं जनता को उपलब्ध कराई जा रही हैं। - एसपी सिंह, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी