प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में लाना है कि जनपद हाथरस में दिन पर दिन कांग्रेस पार्टी कमजोर होती जा रही है। कमजोर होने के संकेत बहुत स्पष्ट हैं। हाथरस शहर भाजपा का गढ़ है, क्योंकि एकतरफा वैश्य समुदाय भाजपा के साथ है। आंतरिक साठगांठ कर्ता को कांग्रेस का शहर अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने अपने खुद के जनाधार को भी धीरे-धीरे खो दिया। जो व्यक्ति नौ वर्ष पार्टी का शहर अध्यक्ष रहा, उसने उन नौ वर्षों में नौ व्यक्ति वैश्य समाज के पार्टी से नहीं जोड़े। यह बातें वार्ता के दौरान प्रदेश महासचिव योगेश कुमार ओके ने कहीं।
उन्होंने कहा कि जो अन्य जाति समुदाय के लोग पार्टी से जुड़े थे, उनका मनोबल कमजोर कर उन्हें पार्टी से दूर होने को विवश कर दिया। उनको घर बैठना पड़ा। लगातार नगर पालिका चुनावों में करारी हार इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 2012 में सुरेंद्र शर्मा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। तब हाथरस विधानसभा में 31 हजार वोट आए थे। उसके बाद 2017 में जिलाध्यक्ष करुणेश मोहन दीक्षित के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव हुआ। तब भी 27 हजार वोट विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी को मिले। जैसे ही तत्कालीन शहर अध्यक्ष को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2022 विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें गलत निर्णयों के कारण ही पार्टी मात्र 26 सौ वोटों पर सिमटकर रह गई।
जिला संगठन मजबूती की झूठी रिपोर्ट बनाकर प्रांतीय पदाधिकारी जो हाथरस में प्रभार संभाले थे उनसे सांठगांठ कर नेतृत्व को गुमराह किया। जबकि यदि मुद्दों पर कांग्रेस संगठन संघर्ष करता तो लोग पार्टी से जुड़ते। समर्पित एवं पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर पार्टी लगातार कमजोर किया गया। वार्ता में पूर्व पीसीसी सदस्य अशोक गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष करुणेश मोहन दीक्षित, रामवीर उपाध्याय, पूर्व जिला उपाध्यक्ष अवधेश बख्शी, पूर्व कोषाध्यक्ष अजीत गोस्वामी, पूर्व महामंत्री संजीव आंधीवाल, कृपेंद्र सिंह चौहान, युवा नेता लोकेश कुमार आदि थे।