तापमान में गिरावट और ठंडी हवा बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों को बीमार बना रही है। ठंडी हवा से श्वांस नली सूख रही हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। यह संक्रमण खांसी, बलगम व श्वांस लेने में दिक्कत पैदा कर रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल में 176 बच्चे सर्दी, खांसी व श्वांस की बीमारी से पीड़ित होकर पहुंचे।
अभिभावकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
बदलते मौसम में बच्चे दोहरी मार झेल रहे हैं। वायरल संक्रमण व बुखार के साथ-साथ ठंड भी इनकी सेहत पर बुरा असर डाल रही है। इन दिनों जिला अस्पताल में दोनों ही तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। बुखार के मरीजों में कुछ गिरावट आई है, लेकिन सर्दी और खांसी के मरीज बढ़े हैं। डॉक्टरों ने बताया कि ठंडी व शुष्क हवा से फेफड़ों की वायु कोशिकाएं सूखती हैं और कमजोर हो जाती हैं। बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमण होते ही वायु कोशिकाएं सूख जाती हैं तथा इनमें तरल पदार्थ भर जाता है। फेफड़ों की कार्य क्षमता कम होने लगती है। इससे खांसी, तेज बुखार व सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है।
बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में कुल 1768 मरीज पहुंचे। इनमें 176 बच्चे भी शामिल रहे। इनमें से अधिकतर बच्चों को खांसी व सर्दी की शिकायत थी। 33 बच्चों को श्वांस लेने में समस्या हो रही थी। इनमें निमोनिया के शुरुआती लक्षण दिखने पर जांच कराई गई। इनके अलावा वायरल बुखार के 166 मरीज पहुंचे। श्वास से पीड़ित 286 मरीज पहुंचे।
इन बातों का रखें ध्यान
-गर्म कपड़े, मोजे व दस्ताने जरूर पहनाएं।
-एक वर्ष तक के बच्चों के सिर व कान ढक कर रखें।
-खांसी व सांस लेने की समस्या पर चिकित्सक से उपचार लें।
-सुबह, शाम और रात को गुनगुना पानी ही पिलाएं।
-ठंडी हवा व प्रदूषण से बचने के लिए मास्क लगाएं।
इस समय वायरल संक्रमण और श्वांस के मरीज अधिक हैं। बच्चों में सर्दी, खांसी व श्वांस की समस्या अधिक है। अभिभावकों को खास ध्यान देने की आवश्यकता है। लापरवाही पर निमोनिया हो सकता है। बच्चे को खांसी व श्वांस लेने में दिक्कत हो तो तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।
डाॅ. प्रमोद, बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल।