महिलाओं का कहना है कि पहले महिलाएं नौकरी आदि नहीं करती थीं। अब ज्यादातर महिलाएं कामकाजी हो गई हैं। ऐसे में एक माह पहले से ही चिप्स-पापड़ बना पाना मुमकिन नहीं हो पाता। इसलिए बाजार के रेडीमेड चिप्स-पापड़ को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
बंदरों के उत्पात ने प्रभावित की परंपरा
घरों में चिप्स-पापड़ सामान्य तौर पर छतों पर बनाए जाते थे। इन्हें सुखाने के लिए धूप में रखा जाता था, लेकिन बंदरों के उत्पात ने लोगों का छतों पर जाना कम करा दिया है। बंदरों के उत्पात के चलते होने वाली घटनाओं के चलते महिलाएं खान-पान की वस्तुओं को धूप में सुखा नहीं पातीं।