इस साल स्थानीय बर्तन कारोबार काफी कम होता दिखाई दिया है। बर्तन की खरीदारी सिर्फ परंपरागत रूप से शगुन बतौर की गई। धनतेरस पर लोगों ने बर्तन की जगह अन्य प्रकार के घरेलू उत्पाद खरीदने पर ज्यादा जोर दिया।
ऑनलाइन बाजार भी रहा हावी
पिछले सालों की अपेक्षा इस साल दिवाली सीजन के हाजिर बाजार पर ऑनलाइन बाजार काफी हद तक हावी रहा। बाजारों में भीड़ दिखने के बाद भी ऑनलाइन बाजार के प्रचार-प्रसार ने कुल कारोबार का बड़ा हिस्सा अपने नाम किया। इसमें इलेक्ट्रोनिक्स, घरेलू उत्पाद और कपड़ा कारोबार की बड़ी हिस्सेदारी रही।
देसी मूर्तियों की रही ज्यादा मांग
धनतेरस के दिन दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों बिक्री भी खूब हुई। जिले में फिर एक बार पूरी तरह से माटी के प्रयोग से मूर्तियां और दीपक तैयार किए गए हैं। खरीदारों के बीच भी देसी मूर्तियां काफी लोकप्रिय रहीं। इस साल बाजारों में 40 रुपये से 11 सौ रुपये तक के मिट्टी के लक्ष्मी गणेश आदि मूर्तियां उपलब्ध हैं। चाईनीज लक्ष्मी गणेश इस साल बाजार से पूृरी तरह गायब मिले।
खील, खिलौने, बताशे की हुई खरीदारी
जिले के बाजारों में शुक्रवार को खील, खिलौने और बताशे की खरीदारी भी की गई। दिवाली पर इन वस्तुओं से लक्ष्मी-गणेश का पूजन करने का शगुन है। इसके अलावा मिट्टी के दीपक, झाड़ू, रुई, सींक और पूजा-पाठ के अन्य सामान की भी खरीदारी हुई।
इस साल कारोबार काफी अच्छा हुआ है। हमारे 500 से अधिक वाहन इस साल बिक चुके हैं। अभी दिवाली के लिए भी वाहनों की बुकिंग जारी है।-गौरव सेकसरिया, ऑटोमोबाइल कारोबारी
सराफा कारोबार में इस साल काफी बूम है। हम लोग इस साल बाजार कुछ हल्का मान रहे थे, लेकिन अंत समय पर बाजार में अच्छा बूम आया है, लोगों की ओर से अच्छी खरीददारी की गई है।-मोहनलाल सराफ, सराफा कारोबारी
इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार पर हर साल ऑनलाइन कारोबार का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीद भी बढ़ रही है। हाजिर में भी खूब कारोबार हो रहा है। धनतेरस पर अच्छा कारोबार रहा है।-मोहित खंडेलवाल, घरेलू उत्पाद विक्रेता