हाथरस में करीब 150 ईंट-भट्ठे हैं। जीएसटी की दरों में बढ़ोत्तरी के विरोध और सस्ती दरों पर कोयला उपलब्ध कराने की मांग को लेकर ईंट-भट्टा कारोबारी हड़ताल कर रहे हैं। इस कारण दिसंबर में नई ईंटों का उत्पादन शुरू नहीं हो सका।
अब आशियाना बनाना महंगा हो गया है। ईंट-भट्ठों पर हड़ताल के चलते नई ईटों की आवक शुरू नहीं हो सकी है। साथ ही सीमेंट के दाम भी हर रोज बढ़ रहे हैं। ऐसे में निर्माण सामग्री के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
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हाथरस में करीब 150 ईंट-भट्ठे हैं। जीएसटी की दरों में बढ़ोत्तरी के विरोध और सस्ती दरों पर कोयला उपलब्ध कराने की मांग को लेकर ईंट-भट्टा कारोबारी हड़ताल कर रहे हैं। इस कारण दिसंबर में नई ईंटों का उत्पादन शुरू नहीं हो सका। इस कारण ईंट के दाम छह हजार रुपये प्रति एक हजार ईंट तक पहुंच गए हैं।
हालांकि जल्द ही हड़ताल खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में फरवरी के दूसरे सप्ताह से नई ईंटों का उत्पादन शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा कई कंपनियों के सीमेंट के दाम में भी 15 रुपये प्रति बोरे तक की बढ़ोतरी की गई है।
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भट्ठे बंद होने ईंट के दाम आसामन छू रहे हैं। छह हजार रुपये में एक हजार ईंट मिल रही हैं। निर्माण सामग्री महंगी होने से काफी परेशानी हो रही है। वैसे कारोबारी ईंट के दाम कम होने की बात कह रहे हैं। - रिंकू, ग्राहक
ईंट के दाम छह हजार पर प्रति हजार पहुंच गए हैं। नई ईंट बाजार में है नहीं। सीमेंट के दाम भी बढ़ गए हैं। इस कारण निर्माण कार्य कराना मंंहगा हो गया है। - मुकेश पंडित, आमजन
वर्तमान में 150 ईंट-भट्टे जिले में पंजीकृत है। उम्मीद है कि इस माह में ईंट-भट्ठों का फिर से संचालन होगा। इससे बाजार में ईंट के दाम कम होंगे। - कमल गोयल भट्ठा, संचालक
सीमेंट के दामों में हर रोज उतार चढ़ाव हो रहा है। प्रति बारे पर 15 रुपये की बढ़ोत्तरी है। एक बोरी 360 से लेकर 380 रुपये में मिल रही है। जनवरी से मार्च तक क्लोजिंग होती है। इस कारण भी रेट बढ़ गए हैं। - मूलचंद्र, सीमेंट विक्रेता