हसायन/हाथरस। मनुष्य को भगवान की प्राप्ति के लिए हमेशा दृढ़ संकल्पित होना चाहिए। बिना संकल्प पूरा किए किसी भी मनुष्य की मृत्यु नहीं होती है। यह विचार गांव बनवारीपुर में श्रीबांकेबिहारी सेवा धाम मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध आचार्य एचएच पुडंरीक गोस्वामी ने प्रवचन करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने वृत्तासुर दैत्य के वध की कथा सुनाते हुए कहर कि हमें वृत्तासुर को शास्त्र में दैत्य लिखा होने के कारण कहना पड़ रहा है। मगर संसार में भी वृत्तासुर जैसा भगवन का भक्त भी पैदा नहीं हुआ। भगवान के दरबार में किसी भी समाज के व्यक्ति से कर्मकांड, अध्ययन, संस्कार शुरू करने पर उसकी जाति धर्म गोत्र. पिता, दादा का नाम सब पूछा जाता है। मगर हमारे ठाकुर की उपासना, वंदना करते समय किसी भी भक्तजन से उसका वर्ण, धर्म, गोत्र नहीं पूछा जाता है। भागवत कथा में अवधेश कुमार सिंह जादौन, सुमंत किशोर सिंह, सीरध्वज सिंह जादौन, सुधीर सिंह जादौन, गोविंद जादौन, गोपाल जादौन, बसंत कुमार सिंह जादौन, धर्मेंद्र कुमार जादौन, भानू सिंह जादौन, सुशील कुमार जादौन, विनय अग्रवाल, उदय प्रताप सिंह बब्बू प्रधान, सुनील कुमार जादौन आदि शामिल थे।