अपर जिलाधिकारी न्यायिक शिव नारायन शर्मा की अध्यक्षता में शामिल मुख्य अग्निशमन अधिकारी व प्रभारी अधिकारी की जांच समिति ने आरोप सही पाए। जांच में यह भी टिप्पणी की गई थी कि यदि फर्जी व कूट रचित लाइसेंसों से अवैध रूप से बेची जा रही आतिशबाजी में ब्लास्ट होने से कोई दुर्घटना घटित हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
सादाबाद के बालाजी नगर के रहने वाले चंद्र प्रकाश ने अपने आतिशबाजी लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए कलेक्ट्रेट में वर्ष 2023 में न्याय सहायक पटल पर आवेदन किया। इस दौरान उन्हें पता चला कि उनके लाइसेंस का कोई ब्योरा पटल पर मौजूद नहीं है। लाइसेंस की अनुमोदन सबंधी पत्रावली भी मौजूद नहीं मिली। उन्होंने इसकी शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी से की। सुनवाई नहीं होने पर मंडलायुक्त से शिकायत की गई, जिसके बाद तत्कालीन डीएम अर्चना वर्मा ने जांच समिति गठित की थी। जांच में पाया गया था कि आतिशबाजी निर्माण और भंडारण के लिए लाइसेंस जारी करने से पहले डीएम का अनुमोदन नहीं लिया गया, न ही जरूरी अभिलेखों में विवरण दर्ज किया गया।
इन लोगों को जारी किए गए लाइसेंस
राकेश कुमार निवासी घंटाघर, अजय कुमार निवासी नजिहाई बाजार घंटाघर हाथरस, कपिल गुप्ता निवासी हलवाई खाना पुरानी छिपैटी, धर्मेंद्र कुमार वार्ष्णेय निवासी सीकनापान गली, उदयप्रकाश निवासी नगला लाला सिकंदराराऊ, हमवीर सिंह निवासी गढ़ी कछवा, थाना चंदपा, हुकुम चंद निवासी इगलास अड्डा, अनीता शर्मा निवासी मोहल्ला ब्राहमणपुरी सासनी, चंद्र प्रकाश निवासी बालाजी नगर सादाबाद, आशीष कुमार गुप्ता निवासी गढौला रोड हसायन, लक्ष्मी देवी निवासी मोहल्ला जामुनवाला सासनी के अलावा सात और लाइसेंस जारी किए गए। सभी लाइसेंस 2014 से 2020 के बीच जारी किए गए।