नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दो सत्रों में यह प्रशिक्षण हुआ। इसमें अहम जानकारी दी गई। तदुपरांत डीएम रमेश रंजन ने भी ग्राम प्रधानों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए उन्हें विकास कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
प्रशिक्षण को लेकर जनपद स्तर से 23 क्लस्टरों का निर्माण किया गया। इसमें एक क्लस्टर में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान हैं। प्रत्येक पर एक सचिव को नोडल रूप में नियुक्त किया गया। प्रशिक्षण राज्य स्तर के अधिकारियों और मंडल स्तर के अधिकारियों द्वारा दिया गया है। प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन व उद्देश्य पर चर्चा मंडलीय उपनिदेशक पंचायत द्वारा की गई। इस दौरान डीएम रमेश रंजन ने ग्राम प्रधानों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों में तालाब का सौंदर्यीकरण व ग्राम पंचायतों में सभी नालियों का जुड़ाव किसी न किसी तालाब से होना चाहिए। बिना अवरोध के नालियों का पानी तालाब तक पहुंचाना है। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के ऊपर विशेष ध्यान दिया जाए। जिले में कुछ ग्राम पंचायत में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था प्रारंभ की जा चुकी है। पॉलिथीन पूरी तरह से प्रतिबंध है। ग्राम पंचायतों में खेल का मैदान विकसित किया जाना है। इन मैदानों में बच्चे के खेलने के लिए व बुजुर्ग व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था हो। जिससे बच्चों के शारीरिक विकास में वृद्धि होगी।
डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए कि नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों के प्रशिक्षण में वित्तीय नियमों की जानकारी के संबंध में एक अलग से सत्र आयोजित किया जाए। जिससे ग्राम प्रधानों को किस योजना से कौन से कार्य होने के बारे में जानकारी मिल सके। इस मौके पर प्रवीणा चौधरी, पीयूष एंटोनी, डॉ. प्रीति सिंह राज्य परामर्शी पंचायती राज लख़नऊ, अशोक कुमार शाही मंडलीय उपनिदेशक मिर्जापुर मंडल, योगेंद्र कटियार नोडल स्वच्छ भारत मिश, मनोज कुमार शुक्ला राज्य परामर्शी निदेशालय ने अहम जानकारी दी। दूसरे सत्र में तकनीकी सत्र ई-ग्राम स्वराज की पूरी जानकारी प्रशांत कुमार एवं रितेश शर्मा राज्य परामर्शी निदेशालय व मंडलीय परियोजना प्रबंधक द्वारा दी गई। इस अवसर पर जिला पंचायत राज अधिकारी बनवारी सिंह, डीपीसी शैलेंद्र लवानियां, योगेश सारस्वत आ दि थे।