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Hathras News: सात वर्षों से चल रहा मुकदमा 17 मिनट में ही निपट गया

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राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ करते जिला जज।  स्रोत : सूचना विभाग - फोटो : Samvad
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दांपत्य जीवन में आई दरार तो बात मुकदमेबाजी तक पहुंच गई। सात से साल से मुकदमा चल रहा था। राष्ट्रीय लोक अदालत में यह मात्र 17 मिनट में निपट गया। आपसी समझौते के आधार पर 33 पारिवारिक विवाद और एक प्रीलिटिगेशन वैवाहिक मामले का निस्तारण किया गया।
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इनमें से नौ जोड़े राजी-खुशी अपने घर चले गए।शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल निस्तारित किए गए 33 परिवार वादों में अधिकांश मामले भरण पोषण से संबंधित थे। पति-पत्नी के मध्य छोटी-छोटी बातों पर शुरू हुए विवाद इतने बढ़ गए कि मामले न्यायालय तक पहुंच गए।



तहसील सासनी क्षेत्र के एक गांव के एक व्यक्ति का वाद वर्ष 2017 से सिविल न्यायालय में विचाराधीन था। सात साल से मामला चला आ रहा था। सिविल जज जूनियर डिवीजन के न्यायालय से आपसी समझौते के आधार पर यह मामला 17 मिनट में निस्तारित हो गया। अन्य मामलों में प्रधान न्यायाधीश रविंद्र कुमार और पक्षकारों के प्रयासों से समझौता हो गया।
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केस संख्या एक

थाना सादाबाद क्षेत्र के एक गांव की एक महिला का अपने पति से भरण पोषण का वाद चल रहा था। दोनों के मध्य समझौता हो गया। पति-पत्नी राजी-खुशी अपने घर गए।





केस संख्या 2

थाना मुरसान क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली एक महिला का अपने पति से विवाद चल रहा था। इस महिला के तीन बच्चे थे, जो महिला के ही साथ रह रहे थे। लोक अदालत में हुए समझौते के बाद पति-पत्नी साथ-साथ गए और घर टूटने से बच गया। महिला का कहना है कि अब बच्चों की शिक्षा अच्छी हो सकेगी।




केस संख्या 3

थाना चंदपा क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली एक महिला का अपने पति से भरण पोषण का वाद चल रहा था। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के यहां से मामला लोक अदालत में निस्तारित हो गया।






राष्ट्रीय लोक अदालत में हुआ 60,930 वादों का निस्तारण

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ जनपद न्यायाधीश सतेंद्र कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया।इस साल की प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के कुल 60,930 वादों का निस्तारण हुआ।




इसमें 30 मोटर दुर्घटना प्रतिकर के वाद का निस्तारण कर 18972200/-रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए। 91 सिविल वादों, 33 पारिवारिक वाद, 307 विद्युत अधिनियम के वादों का निस्तारण कर 320000/ रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल किए गए। धारा 138 एनआई एक्ट के 24 वादों, 27459 राजस्व वादों का निस्तारण किया गया। दो वाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग एवं 8196 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण कर 7,33,460 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल किए गए। इसके अतिरिक्त प्रिलिटीगेेशन स्तर पर बैंक व विद्युत के कुल 24785 मामलों का निस्तारण कर 41981405 रुपये में समझौता दाखिल किया गया।





तीन वादों का निस्तारण स्थायी लोक अदालत के माध्यम से हुआ। जनपद न्यायाधीश, सतेन्द्र कुमार के न्यायालय से नौ सिविल वादों एवं 17 फौजदारी वादों का निस्तारण कर 1000 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल किए गए। पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, सुधीर कुमार के न्यायालय से 30 मोटर दुर्घटना प्रतिकर के वादों का निस्तारण कर 18972200/ रुपये प्रतिकर के रूप में दिलाए गए। अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत राजेश कुमार के न्यायालय से तीन वादों का निस्तारण किया गया। अध्यक्ष, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, राकेश कुमार-चतुर्थ के न्यायालय में वादों का निस्तारण कर 352195 रुपये दिलाए गए ।
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