हाथरस। किला गेट खाई स्थित अंजुमने हैदरी के इमाम बारगाह में मोहर्रम के पांचवे दिन करबला के शहीदों की याद में मरसिया, मजलिस नौहा व मातम हुआ।
मजलिस से पहले तनवीर कमर और मोबीन ने मरसिया, सोजन व सलाम पढ़ा। मजलिस पढ़ते हुए मौलाना जाकिर हुसैन ने कहा कि हजरत मोहम्मद स.अ. के छोटे नवासे इमाम हुसैन ने इस्लाम मजहब की बुलंदी, सच्चाई और हक की बात ऊंची रखने और इंसानी आजादी को वक्त के जालिम व सितमगर यजीद के चंगुल से निकालने के लिए अपने बहत्तर साथियों समेत करबला में यजीदी फौज के हाथों भूख व प्यास की हालत में 10 अक्तूबर सन् 680 ईंसवी को शहीद कर दिए गए, जिसमें जवान, बुजुर्ग और छह माह का छोटा बच्चा अली असगर भी था।
मजलिस के बाद सफदर अब्बास साहिल सैफ व नकी, जलाल हैदर ने नौहा पढ़ा। मजलिस में अंजुमन हैदरी हाथरस के मेंमबरान डॉ.एसजी हसन, जाहिद हुसैन, हामिद हुसैन, आबिद हुसैन, तकी, वाजिद, शब्बर बाबी, शाकिर, छोटू, पप्पू, एजाज, मेंहदी, कमर, रजा, वाकर, ऐनुल, फैजी, दन्नू, काशिफ व हसन मोहम्मद ने शिरकत की।