ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
हाथरस। शासन ने भले ही सभी विभागों की कब्जा की गई भूमियों को मुक्त कराने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कृषि उत्पादन मंडी समिति प्रशासन मंडी की कब्जा की गई भूमि को मुक्त कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। हालांकि पूर्व में शिकायत के बाद जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह ने मंडी के सभापति उपजिलाधिकारी अमिताभ यादव से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी।
ज्ञात रहे कि कृषि उत्पादन मंडी समिति के निर्माण के समय किसानों को उनकी भूमि का मुआवजा दिया गया। इसके साथ ही इन किसान परिवारों के एक एक आश्रित को विभाग में नौकरी भी दी। किसानों की सभी शर्तें पूरी किए जाने के बाद भी इन किसानों ने मंडी से मुआवजा और नौकरी तो प्राप्त कर ली। लेकिन मंडी की जमीन के एक बडे़ हिस्से पर से कब्जा नहीं छोड़ा। जिससे मंडी के बीच में आज भी यह लोग मकानों का निर्माण कराकर आसानी से रह रहे हैं।
हालांकि जब मंडी की भूमि कब्जा मुक्त नहीं हुई तो इसकी शिकायतों के बाद 2010 में इन किसानों को मंडी प्रशासन की ओर से नोटिस भी जारी किए गए। लेकिन तत्कालीन जिला प्रशासन पर उक्त कार्रवाई के बाद स्थानीय राजनेताओं ने दबाव बनाकर इस कार्रवाई को ठप करा दिया। अब जब शासन व जिला प्रशासन इस प्रकार के अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है, तो अब मंडी प्रशासन इन कब्जों को हटाने में क्यों रुचि नहीं दिखा रहा है। यह बात समझ से परे हैं। मंडी अधिकारियों ने एक और कारिस्तानी कर रखी है कि उक्त कब्जेदारों को ही इन कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अधिकृत कर रखा है। जिससे अक्सर मंडी प्रशासन शासन के पत्राचारों को भी जवाब इन कब्जेदारों को लाभ पहुंचाने की मानसिकता से ही देता हैं।
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-मंडी के की जमीन पर कब्जे की शिकायत पर जिला प्रशासन से जो भी आदेश निर्देश प्राप्त होंगे विधिवत रूप से कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में भी इन कब्जेदारों के खिलाफ नोटिस आदि जारी किए जाने की कार्रवाई की गई थी।
-रामबाबू शर्मा, मंडी सचिव
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