न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
एक ओर आवारा पशु तो अब दूसरी ओर मौसम का मिजाज खेती पर भारी पड़ रहा है। सादाबाद क्षेत्र के कई गांवों में खेतों में आलू की फसल पर सफेद चादर बिछ गई। खेतों में लहलहा रही फसल सफेद चादर बिछने से मुरझा गई। फसल पर बिछी बर्फ की चादर को देखकर किसानों के चेहरे भी सफेद पड़ गए। फसल को बचाने के लिए किसान प्रयासों में जुट गए हैं। दिन रात फसलों की सिंचाई की जा रही है।
आलू के पौधों पर बर्फ से मानो आग लग गई। फसल के पत्ते बुरी तरह से मुरझा गए हैं। अभी तक किसान सुबह शाम फसल को दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती देख मन ही मन खुश थे, किसानों का मानना था कि अबकी बार आलू फिर से उन्हें राहत प्रदान करेगा, लेकिन सोमवार की सुबह अपने खेतों का नजारा देख किसानों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
बर्फीली सफेद चादर ने कई हेक्टेयर में खड़ी आलू की फसल को अपनी चपेट में ले लिया। पत्ती झुलस कर काली पड़ गईं। यह देखकर एक बार फिर किसानों के अरमान आंसुओं में बह गए हैं।
गांव धानौटी के किसान चोब सिंह पहलवान ने बताया कि उनके करीब तीन हेक्टेयर खेत में आलू की फसल पर बर्फ की चादर बिछ गई है। इसी तरह का हाल गांव के अन्य कई किसानों का है, जिनमें यादराम सिंह, शशिपाल, नेक मोहम्मद आदि हैं।
चोब सिंह ने तहसील दिवस में भी शिकायती पत्र सौंपकर बर्फीली चादर की वजह से फसल में हो रहे नुकसान की शिकायत की है। इधर, किसानों का मानना था कि इस बर्फीली चादर का प्रभाव दो दिन बाद दिखना शुरू हो जाएगा। फिलहाल किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर फसल को बर्फीली चादर के प्रकोप से बचाने के प्रयासों में लगे रहे।