Jila Panchayat Adhyaksh Hathras
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जिला बनने के बाद पहली बार पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के परिवार को विरोधी दलों की घेराबंदी के चलते सियासी हार का मुंह देखना पड़ा है। वर्ष 2000 से जिला पंचायत पर चली आ रही पूर्व मंत्री परिवार की हुकूमत को हिलाने में भी बसपा विरोधी दल फिलहाल तो कामयाब हो ही गए हैं, लेकिन विपक्ष की असली चुनौती तो अब शुरू होगी। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद कब्जाने के साथ तय होगा कि जिला पंचायत में रामवीर की हुकूमत कायम रहेगी या नहीं।
जिला बनने के बाद पहली बार 14 जनवरी 2000 को बसपा ने पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाकर जिला पंचायत पर कब्जा किया था। इसके बाद से लगातार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बसपा का कब्जा रहा है। पिछले 17 वर्ष 5 माह के बाद बसपा का मजबूत किला रही जिला पंचायत में बसपा को पहली बार मुंह की खाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
यह भी तब संभव हो सका, जब बसपा के समर्थन पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लडे़ दो सदस्यों ने पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष के विरोध में मतदान किया। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बावजूद अपना जिला पंचायत अध्यक्ष पद का संभावित प्रत्याशी बताने से बचते नजर आए, क्योंकि विपक्ष यह भी जानता है कि उनकी ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष का नाम तय होते ही इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है।
जिला पंचायत में बसपा की कमजोर स्थिति का रणनीतिकारों को उसी समय से ही अंदाजा हो गया था, जब पार्टी ने पूर्व विधायक गेंदालाल चौधरी को पार्टी से निकाल दिया था। जबकि दो जिला पंचायत सदस्य पहले से ही पूर्व विधायक के भरोसेमंद थे।
इन दो सदस्यों के दम पर ही विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति बनाई, क्योंकि इस बार के जिला पंचायत चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी विनोद उपाध्याय के खिलाफ सपा की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रत्याशी बनाई गई ओमवती यादव ने पूरे विपक्ष को एकजुट कर लिया था। इसके बावजूद वह एक वोट से चुनाव हार गई थीं।