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Hathras News: 50 गांवों को 29 साल से बस सेवा का इंतजार

Mon, 25 May 2026 02:36 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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रोडवेज बस।  - फोटो : Archive
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हाथरस जिले का गठन हुए करीब 29 साल हो चुके हैं, लेकिन सादाबाद से जलेसर मार्ग पर हाथरस डिपो की कोई बस नहीं चली है। करीब 50 से अधिक गांवों के लोग आज भी रोडवेज बस सेवा के लिए तरस रहे हैं। उन्हें निजी वाहनों के भरोसे ही यात्रा करनी पड़ती है। शाम सात बजे के बाद साधन नहीं मिलता है।
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लगभग 12 वर्ष पहले तत्कालीन विधायक देवेंद्र अग्रवाल की पहल पर जलेसर रोड से सहपऊ होकर तीन महीने तक बसें चली थीं। इसके बाद मथुरा डिपो की एक बस सहपऊ से जयपुर के लिए सुबह छह बजे चलाई गई थी। वह बस रात करीब आठ बजे सहपऊ आकर रुकती थी। यह सेवा कुछ महीने बाद बंद हो गई। बीते आठ माह से एटा डिपो की एक बस एटा से मथुरा के लिए चलती है। यह बस सुबह 9:30 बजे कस्बा के धर्मशाला चौराहा से गुजरती है। दोपहर 12:30 बजे यह मथुरा से वापस आती है। यह बस कस्बा के अंदर नहीं जाती है। ग्रामीणों को निजी बसों, ई-रिक्शा, टेंपो या निजी चार पहिया वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस मार्ग से मढ़ाभोज, मानिकपुर सहित लगभग 50 गांव के लोग यात्रा करते हैं। बस सेवा की कमी से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। जिससे स्थानीय लोगों में रोष है।

मुसाफिर बोले

जिला बनने से पहले इन मार्गों पर निजी बसें चलती थीं, पर उनका कोई समय निर्धारित नहीं था। रोडवेज बस सेवा के नाम पर महज एक बस है। वह भी एटा डिपो की है।
मुन्नालाल दीक्षित, यात्री।
शाम सात बजे के बाद निजी बसें भी बंद हो जाती हैं। बसें नहीं चलने से ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। यह स्थिति उनकी दैनिक जीवनचर्या को प्रभावित करती है।
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दिनेश शर्मा, यात्री।

इस मार्ग पर पड़ते हैं यह गांव
मढ़ाभोज, मढ़ापिथू, तामसी, बटपुरा, थरौरा, बागपुर, वासबित्ता, नगला परसू, करकौली, धाधऊ, सुल्तानपुर, नगला मनी, नगला सेवा, सिखरा, लोधई, रुदायल, नगला चिमन, महरारा, बुढ़ाइच, मानिकपुर, नवलपुर, सेदरिया, नगला मेवा,नगला सुखराम, नगला बादाम, कोंकना कलां, मकनपुर, खेरिया, रसगवां, कोंकना खुर्द, कुकरगवां, नगला बंजारा, बाग बधिक, दौहई, नगला सलेम, नगला आम, ईसौंदा, बाबली, नगरिया, उधैना और जरीपुरा आदि।

बयान
प्रदेश सरकार ने ग्रामीण बस सेवा के संचालन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए मार्गों को चिह्नित कर शासन को रिपोर्ट भेज दी है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद गांवों के लिए बसें प्रारंभ कर दी जाएंगी। - मंगेश कुमार, डिपो प्रभारी।
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