फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जल्द ही संग्रहालय के रूप में विकसित होगा काका स्मारक

विज्ञापन
विज्ञापन
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
विज्ञापन

हाथरस। शहर में कई स्थानों पर पद्मश्री काका हाथरसी के जन्म और अवसान दिवस पर कार्यक्रम हुए। मुख्य कार्यक्रम काका हाथरसी स्मृति भवन मुरसान गेट पर हुआ। इसमें काफी तादाद में शहर के साहित्यकार, समाजसेवियों व अन्य लोगों ने भाग लिया और काका को स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने काका से जुड़ी यादें ताजा कीं और कहा कि काका हाथरसी स्मारक जल्द ही संग्रहालय के रूप में विकसित होगा। सबसे पहले काका के छवि चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए।

काका हाथरसी स्मारक समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस और पूर्व मंडलायुक्त डॉ. रविकांत भटनागर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में सांसद की पत्नी श्वेता दिवाकर और अनुपमा भटनागर मौजूद थीं। उद्घाटन पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने किया। वरिष्ठ भाजपा नेता रमेशचंद्र रत्न, पूर्व ब्लॉक प्रमुख ओंकार सिंह वर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष अगम प्रिय सत्संगी, एसडीएम सदर अरुण कुमार, जितेंद्र स्वरूप शर्मा फौजी, लालता प्रसाद जैन, कैलाशचंद्र जैन, श्यासुंदर शर्मा बंटी भैया, दयाराम शीतल, रत्नेश रत्न थे। सांसद की पत्नी श्वेता दिवाकर ने काका हाथरसी को हाथरस की शान बताया।
विज्ञापन


उन्होंने सांसद द्वारा काका जी की स्मृतियों को संजोकर रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। पूर्व मंडलायुक्त डॉ.रविकांत भटनागर ने कहा कि काका स्मारक को जल्द ही संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने इस आयोजन के लिए संयोजक गोपाल चतुर्वेदी और विद्यासागर विकल की भी काफी प्रशंसा की। कार्यक्रम में सुबोध शर्मा, रतन गुप्ता, बृजेश वशिष्ठ, बृजेश शुक्ला, अनिल बौहरे, रामजीलाल शिक्षक, प्रवीन वार्ष्णेय, हरिमोहन शर्मा गुरुजी, अनिल शर्मा, संजय सिन्हा, वासुदेव उपाध्याय, शिवशंकर गुलाटी, माधव शर्मा, रमेशचंद्र शर्मा बह्मचारी, केके दीक्षित, प्रदीप पंडित, देवी सिंह निडर, वैद्य मोहन बृजेश, भजनलाल, अंकित शर्मा, महावीर प्रसाद, रामबाबू दीक्षित आदि ने काका जी का स्मरण किया। इसमें से कुछ कवियों ने काव्यपाठ भी किया। अंत में काका हाथरसी स्मारक समिति के सचिव डॉ. वीपी सिंह ने आभार व्यक्त किया। संचालन गोपाल चतुर्वेदी और विद्यासागर विकल ने संयुक्त रूप से किया।
संगीत कार्यालय पर भी काका हाथरसी का जन्म एवं अवसान दिवस मनाया गया। वहां संगीत सेवकों ने काका के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित और माल्यार्पण किया। कार्यालय के पुराने सेवकों ने काका के समय के अनेक प्रसंग सुनाए। इस मौक पर व्यवस्थापक शरण गोपाल, नंद किशोर निर्मोही, कुंदनलाल, प्रदीप भटनागर, सुधीर कुमार, मोहित वर्मा, योगेंद्र पाल सिंह, दिलीप कुमार, उमेश निवौरिया आदि थे।
-----
बीच के बॉक्स के लिए--
अमेरिका में गूंजी काका की रचनाएं
हाथरस। अमेरिका से काका के पौत्र अशोक गर्ग ने अमेरिका के सेन डिएगो नगर में आयोजित काका हाथरसी स्मृति समारोह में काका की रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को लोट-पोट कर दिया।
---
बीच के बॉक्स के लिए----
जब इंटरव्यू में पूछी गई काका की कविता--
हाथरस। बागला डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. आरके शर्मा का कहना है कि काका वर्षोँ से हाथरस की पहचान बने हुए हैं। एक संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1967 में केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक के लिए जब उनका जयपुर में साक्षात्कार हुआ तो वहां पैनल में से एक सदस्य ने पहले तो उनसे यह पूछा कि वह कहां के रहने वाले हैं। उन्होंने जब यह बताया कि वह हाथरस के रहने वाले हैं तो उस सदस्य ने कई नए कवियों की कविताएं सुनाई और यह पूछा कि इनमें से यह बताओ की काका हाथरसी की कविता कौन सी है। डॉ. शर्मा कहते हैं कि उस समय कॉलेज के कार्यक्रमों में काका काव्यपाठ करने आते थे। उन्हें काका की काव्यशैली मालूम थी। उन्होंने इसका सटीक उत्तर दे दिया। अन्य सवालों के जवाब भी उन्होंने सही दिए। ऐसे में उनका चयन हो गया।
विज्ञापन

---
बीच के बॉक्स के लिए----
काका को भूला रेलवे प्रशासन
हाथरस। एक तरफ जहां शहर में काका हाथरसी का जन्म और अवसान दिवस मनाया गया। वहीं रेलवे प्रशासन ने काका की सुधि नहीं ली। हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन पर काका की स्मृति में पट्टिका लगी है और कमरा भी बना है। रेलवे प्रशासन हर साल वहां कार्यक्रम कराता है, लेकिन मंगलवार को रेलवे प्रशासन यह भूल गया कि आज ही काका का जन्म और अवसान दिवस है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें