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Hardoi News: एक्सरे में सही नहीं आ रही रिपोर्ट, सीटी स्कैन के लिए बढ़े मरीज

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हरदोई। टोडरपुर के धनवार निवासी जितिन को सीने में संक्रमण है। चिकित्सक की सलाह पर पहले एक्सरे कराया गया लेकिन रिपोर्ट साफ नहीं आई। मरीज को सही रिपोर्ट के लिए सीटी स्कैन कराना पड़ा। यह पहला मामला नहीं है एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट सही न आने की वजह से मरीजों को सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। इन दिनों सीटी स्कैन कराने वाले मरीजों में वृद्धि हुई, वहीं बार-बार जांच कराने से मरीज के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
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मेडिकल कॉलेज में एक्सरे के लिए अभी पोर्टेबल मशीन पर निर्भर होना पड़ रहा है। डिजिटल एक्सरे मशीन पर करीब 14 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं लेकिन मशीन अभी भी पुरानी हालत में ही है। डिजिटल मशीन खराब होने से मरीजों को पोर्टेबल मशीन से जांच करानी होती है। इसमें एक्सरे फिल्म भी नहीं मिलती है और मोबाइल पर फोटो लेनी पड़ती है। इस कारण कई बार पिक्चर साफ न होने से चिकित्सक भी सही से आकलन नहीं कर पाते हैं और मरीजों को बार-बार जांचें करानी पड़ती हैं। ऐसे में मरीजों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।


अल्ट्रसाउंड की भी साफ नहीं आ रही रिपोर्ट
मेडिकल कॉलेज में अब अल्ट्रासाउंड भी होने लगे हैं। प्रशिक्षुओं के भरोसे किए जा रहे अल्ट्रासाउंड कई बार साफ नहीं आते हैं। सवायजपुर निवासी दयाराम का पेट का अल्ट्रासाउंड कराया गया लेकिन वह साफ नहीं आया। इस पर चिकित्सकों ने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। दयाराम को भी दोबारा से सीटी स्कैन जांच करानी पड़ी। इसके बाद ही उनका उचित इलाज हो सका।
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सीटी स्कैन के लिए बढ़ी मरीजों की भीड़
एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की जांच रिपोर्ट सही न आने से मरीजों को सीटी स्कैन कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में सीटी स्कैन के लिए मरीजों में वृद्धि हो गई है। जहां अभी तक रोजाना औसतन 30 से 40 मरीजों का सीटी स्कैन हो रहा था, वहीं अब वृद्धि होकर रोज के औसत मरीज 70 से 80 के बीच हो गए हैं। इससे सीटी स्कैन कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रहती है।


डिजीटल एक्सरे मशीन को लेकर अभी बजट का अभाव है। बजट आए तो मशीन बदलने या मरम्मत की प्रक्रिया कराई जाए। वैसे जांच रिपोर्ट तो कमी नहीं आ रही है। किसी रिपोर्ट में कोई दुविधा होती है तो चिकित्सक दूसरी जांच के लिए सुझाव देते हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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