हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के अधीन संचालित महिला अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं।
आलम यह है कि तय समय पर ओपीडी के लिए चिकित्सक बैठती ही नहीं हैं। ऐसे में दूर दराज से आए मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। खास बात यह है कि देर से आकर चिकित्सक तय समय से पहले चले भी जाते हैं। नियम के मुताबिक चिकित्सकों को सुबह आठ बजे से ओपीडी के लिए बैठ जाना चाहिए। मंगलवार सुबह संवाद न्यूज एजेंसी ने महिला अस्पताल की ओपीडी का हाल देखा।
दृश्य-1-
सवा घंटे लगाती रहीं उपस्थिति फिर पहुंचीं ओपीडी करने
समय 8:26 बजे।
महिला अस्पताल की ओपीडी में कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं थे। हालांकि, मरीज भी पहुंचना शुरू ही हुए थे। चिकित्सक न होने की वजह से मरीजों को इंतजार करना पड़ा। लगभग 9:15 बजे डॉ. ममता पहुंचीं। उनसे बात हुई तो बताया कि बायोमीट्रिक उपस्थिति लगाने गए थे। यहां आने से पहले उपस्थिति लगानी होती है।
दृश्य-2-
स्टाफ रूम में रुक गईं, फिर 9:30 बजे आईं
समय सुबह 08:30 बजे।
ओपीडी के दूसरे कक्ष में भी चिकित्सक नहीं थीं। एक प्रशिक्षु मौजूद मिलीं लेकिन उन्होंने नाम बताने से इन्कार कर दिया। लगभग 9:30 बजे डॉ. पुष्पा पहुंचीं। पहुंचते ही ओपीडी शुरू कर दी। देरी की वजह पूछने पर कहा कि सुबह ज्यादा मरीज नहीं होते हैं इसलिए स्टाफ रूम में रुक जाते हैं।
जांच कक्षों में भी समय से नहीं आते कर्मी
ओपीडी में चिकित्सकों के देर से आने के कारण कर्मचारी भी देर से पहुंचते हैं। यहां की पैथाेलॉजी भी देर से खुलती है। वजह यह कि जब चिकित्सक ही देर से आएंगे तो मरीजों को जांच लिखेगा कौन। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए ज्यादा परेशान होना पड़ता है।
चिकित्सकों की उपस्थिति बायोमीट्रिक से दर्ज होती है। ज्यादातर लोग समय पर आ जाते हैं। मरीज न होने पर यह लोग कुछ देर स्टाफ रूम में रुक जाते हैं। मरीजों के आने पर ओपीडी शुरू कर देते हैं। -डॉ. सुबोध कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महिला चिकित्सालय
फोटो-11- महिला चिकित्सालय में ओपीडी कक्ष में खाली पड़ी चिकित्सक की कुर्सी। संवाद