हरदोई। चार साल की कवायद के बाद जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेटर यूनिट तो लग गई, लेकिन इसका संचालन लाइसेंस न होने के कारण नहीं हो पा रहा है। लाइसेंस के लिए स्वास्थ्य महकमे ने शासन में आवेदन किया है, लेकिन यह लंबित है।
जनपद में एक मात्र सरकारी ब्लड बैंक जिला अस्पताल में संचालित है। इसके अलावा एक प्राइवेट ब्लड बैंक संडीला में संचालित है। जिला अस्पताल में ब्लड बैंक तो काफी पुराना है, लेकिन यहां ब्लड सेपरेटर यूनिट नहीं थी। यूनिट में मरीजों को आवश्यकता के मुताबिक सिर्फ प्लाज्मा, प्लेटलेट्स या जो भी तत्व जरूरी हैं, वही उपलब्ध कराया जा सकता है। 2017 में ब्लड सेपरेटर यूनिट की स्थापना को तत्कालीन राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल के प्रस्ताव पर मंजूरी मिली थी, लेकिन फिर भी यह स्थापित नहीं हो पाई थी।
अमर उजाला ने इस मुद्दे को उठाया था और जनप्रतिनिधियों व जिलाधिकारी के साथ ही अस्पताल प्रशासन ने भी इस मामले पर शासन को लगातार पत्र भेजे थे। इसके बाद सितंबर में ब्लड सेपरेटर यूनिट स्थापित कर दी गई थी। लेकिन इसके संचालन का लाइसेंस ब्लड बैंक के पास नहीं है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक 11 नवंबर को लाइसेंस जारी करने के लिए मेडिकल कालेज की प्राचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने शासन को आवेदन भेजा था।
यूनिट का यह है काम
ब्लड सेपरेटर यूनिट में रक्त से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, पीआरबीसी (पैक्ट रेड ब्लड सेल्स), क्रायो आदि अलग-अलग किए जा सकते हैं।
यूनिट में लगी मशीनें
सेंट्रीफ्यूज, प्लेटलेट्स एजीटेटर, बीबीआर, 40 रेफ्रिजरेटर, ब्लड कलेक्शन मॉनीटर, डोनर काउच, लेमिनार एयरफ्लो
मेडिकल कालेज की प्राचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि दो कर्मचारियों आकाशदीप वर्मा और अमन त्रिपाठी को प्रशिक्षण के लिए लखनऊ मेडिकल कालेज भेजने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। दोनों कर्मचारियों को सेपरेटर यूनिट का संचालन करने के लिए एक-एक पखवारे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद शासन की टीम सेपरेटर यूनिट और व्यवस्था का निरीक्षण करेगी। इसके बाद ही लाइसेंस मिल सकेगा।