जिले कटियारी क्षेत्र खद्दीपुर की मूल निवासी
साहित्यकार एवं बिहार राष्ट्रभाषा परिषद की पूर्व निदेशक डा. मिथिलेश
कुमारी मिश्र ने कहा कि भाषा का रोजी रोटी से जुड़ाव होने पर स्वत: ही
विकास हो जाता है। स्वकेंद्रित होते समाज में भी भाषा का विकास सर्वाधिक चल
चित्रों और व्यापार के माध्यम से हुआ है।
भूटान में भी दूरदर्शन से
हिंदी भाषा समाज में जगह बना रही है। भूटान की राजधानी थिम्पू में आयोजित
विश्व मैत्री मंच की अध्यक्षता करने के बाद यहां आई साहित्यकार मिश्र का
पंचनद संयोजक अवनीकांत बाजपेयी के नेतृत्व में लोगों ने स्वागत किया।
डा.
मिश्र ने क्षेत्र के लोगों के साथ विकास पर चर्चा करते हुए अर्जुनपुर पुल न
बनने को लेकर दुख जताया। कहा कि भूटान में ऊंची ऊंची पहाड़ियों में बौद्ध
दर्शन और संस्कृति में जन साधारण को देखा जा सकता है, जो भारतीय संस्कृति
से मेल खाता है तथा वसुदैव कुंटुंबकम का संदेश देता है।
इस मौके पर सरस्वती
सदन की पुस्तकालय अध्यक्ष सीमा मिश्रा, अवधेश मिश्रा, अनुराग पांडेय,
विवेक मिश्रा, राकेश फौजी, आकांक्षा, शताक्षी, रामवीर अग्निहोत्री,
राजेंद्र त्रिपाठी, प्रेमवती मिश्रा, संकल्प आदि मौजूद थे।