हरदोई। विदेशों द्वारा भारत से गेहूं खरीदे जाने की संभावनाओं के बीच स्थानीय बाजारों में गेहूं के दाम बढ़ने लगे हैं।
नए गेहूं की बाजार में आमद होने के बाद भी फिलहाल मंडियों में भाव चढ़ रहे हैं। भाव और अधिक उछलने की आशंकाओं के बीच स्थानीय उद्यमी एवं आटा मिलों के मालिक बड़े पैमाने पर गेहूं खरीदने के लिए बाजार में उतर गए हैं।
इसके चलते फिलहाल बाजार में तेजी बनी हुई है। गल्ला आढ़तों के संचालकों का मानना है कि कुछ दिनों बाद यदि बाजार डाउन नहीं होता है तो फिर इस बार गेहूं की कीमतें नया रिकार्ड बना सकती हैं।
गल्ला आढ़तों के संचालकों के अनुसार, यह चर्चा काफी तेज है कि इस बार भारत से कई देश गेहूं आयात कर सकते हैं। जिसकी संभावनाओं को देखते हुए निजी क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि जिलों में जाकर गेहूं के बाजार एवं उत्पादन के औसत आंकड़ों को लेकर जानकारी कर रहे हैं।
इससे इन चर्चाओं को बल मिला है कि रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते तमाम देशों से भारत से गेहूं के आयात की संभावना तलाश सकते हैं। यही कारण है कि बाजारों में हलचल तेज हो गई है।
आटा मिल मालिक एवं स्टाक करने वाले व्यापारियों में विदेशी मांग की संभावनाओं के बीच तेजी की आशंका है। यही कारण है कि एक माह पहले 19 सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव के आस पास रहे गेहूं की कीमतें दो हजार पचास रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं।
सरकारी समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एक अप्रैल से केंद्रों पर खरीद की जानी है, जबकि अभी से मंडी में गेहूं का भाव 2050 प्रति क्विंटल पहुंच चुका है।
ऐसे में सरकार को तत्काल प्रभाव से समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल करना चाहिए। मंडी का भाव और समर्थन मूल्य लागत के अनुसार नाकाफी है। यदि विदेशों से मांग की संभावनाओं एवं चर्चाओं के कारण किसानों को 2500 के आसपास कीमत मिलती है तो यह सुखद रहेगा ।
- सरोज दीक्षित, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय कृषक दल
बोले व्यापारी
नए गेहूं की आमद अभी मंडी में औसतन 500 क्विंटल के आसपास है। गेहूं का भाव चढ़ना किसानों और आढ़तों के लिए अच्छा संकेत है। गेहूं की आमद बढ़ने पर रेट गिरने की संभावनाएं हैं।
- प्रेम गुप्ता, प्रमुख व्यवसायी
गल्ला मंडी के आढ़ती श्यामाकुमार, कैलाश गुप्ता, संदीप आदि ने बताया कि विदेशों से गेहूं आयात किए जाने की संभावना और चर्चा के बीच रेट बढ़ना किसानों के लिए अच्छा है। यदि संभावनाएं साकार होंगी तो फिर सरकारी समर्थन मूल्य से ऊपर का भाव मंडी में बना रहेगा।