फोटो-29-ड्रेन पर पड़े ह्यूम पाइप से रास्ता बनाते ग्रामीण। संवाद
बारिश होते ही ठप हो जाता आवागमन, तीन दिन मजदूरी कर प्रशासन की खोली आंखें
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई / हरियावां। केंद्र और राज्य सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियां बताने को तो ढेरों गोष्ठियां हुईं, लेकिन शर्मा खेड़ा के ग्रामीणों की समस्या पर किसी की निगाह नहीं गई। परेशान होकर ग्रामीणों ने जेसीबी का इंतजाम किया। फिर तीन दिन तक खुद ही मजदूरी की। अब उन्होंने शर्मा खेड़ा से कुरसेली होते हुए हरियावां जाने का रास्ता खुद ही बना लिया।
हरियावां विकास खंड में ग्राम पंचायत है मरई। मरई का मजरा है शर्माखेड़ा। शर्माखेड़ा में लगभग 600 लोग रहते हैं। आवागमन के लिए यह लोग बिजगवां ड्रेन को पार कर कुरसेली से बनी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। बिजगवां ड्रेन गर्मियों में सूख जाती है, लेकिन बारिश होते ही यहां पानी आ जाता है। लगभग छह माह तक यहां पानी रहता है। ऐसे में आवागमन में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां बिजगवां ड्रेन पर कई साल पहले ह्यूम पाइप डाले गए थे, लेकिन इनके ऊपर न तो पुलिया बन पाई और न ही आवागमन के लिए सड़क बनाई गई। वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए बिजली के सीमेंट के पोल के टुकड़े इन्हीं ह्यूम पाइपों पर डालकर ग्रामीण आवागमन करने लगे। बारिश का मौसम शुरू होने पर ग्रामीणों को फिर से परेशानी सताने लगी, लेकिन इस बार उन्होंने किसी से मदद नहीं मांगी। ग्रामीणों ने आपस में ही बैठकर निर्णय कर लिया। पहले से पड़े ह्यूम पाइपों पर टूटे पड़े सीमेंट के पोल को जोड़ते हुए मिट्टी का भराव कर डाला। मिट्टी का भराव करने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। मिट्टी को बराबर करने के लिए ग्रामीणों ने खुद तीन दिन तक मजदूरी की। अब रास्ता तैयार है और फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि बारिश में उन्हें आवागमन में संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इनसेट
... बच्चों की पढ़ाई जरूरी, स्कूल कुरसेली में
ग्रामीण बताते हैं कि गांव में सरकारी स्कूल नहीं है। गांव से थोड़ी दूर कुरसेली गांव है। वहां स्कूल है। शर्माखेड़ा के लगभग 50 बच्चे कुरसेली में पढ़ते हैं। कुरसेली में पढ़ने वाले बच्चों को आवागमन में परेशानी के कारण कई-कई दिनों तक किताबों से दूर रहना पड़ता था। इस बार ऐसी परेशानी न हो, तो ग्रामीणों ने खुद ही इसका इंतजाम कर लिया।
फोटो-30-छोटे। संवाद
शर्मा खेड़ा निवासी छोटे बताते हैं कि आवागमन में होने वाली परेशानी के बारे में सबको बता चुके हैं। तीन साल से समस्या है, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की, तो खुद ही सब काम कर लिया।
फोटो-31-दीपू। संवाद
दीपू का कहना है कि गांव में कोई अधिकारी आते नहीं। अधिकारी आएं, उनके वाहन खुले ह्यूम पाइप में फंसें तो उन्हें पता चले कि कितनी परेशानी है। जब किसी ने नहीं सुना तो हम लोगों ने खुद ही बना लिया।
वर्जन
ऐसे कुछ बता पाना मुश्किल है। मैं पूरी जानकारी करूंगा। यहां काम क्यों नहीं हुआ, इसके बारे में भी जानकारी जुटा लूंगा। जिस विभाग या अधिकारी की अनदेखी के कारण लोगों को परेशानी हुई, उसकी जिम्मेदारी भी तय होगी। प्रयास रहेगा कि समस्या का स्थायी समाधान करा दें।
अनुनय झा
जिलाधिकारी