हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय परिसर में डेढ़ कराेड़ रुपये से लगे दो ऑक्सीजन संयंत्र कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और नवजात बच्चों को कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन दी जा रही है। प्लांट की सफाई न होने के कारण यह बेकार हो गए हैं।
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल परिसर में दो आक्सीजन संयंत्र लगे हैं। इसमें एक एचसीएल फाउंडेशन की ओर से लगा है तो दूसरा पीएम केयर फंड से स्थापित किया गया है। महिला अस्पताल में लगे संयंत्रों में एक 375 लीटर प्रति मिनट तो दूसरे प्लांट से 250 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता है। इन दोनों संयंत्रों की स्थापना पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उद्देश्य यह था कि ऑक्सीजन के लिए सिलिंडर का इस्तेमाल न हो। हर वार्ड में बेड पर भर्ती मरीज को पाइप से ही ऑक्सीजन की सुविधा मिल जाए। पिछले कई माह से महिला अस्पताल के दोनों संयत्र खराब हैं।
एसएनसीयू वार्ड में भी कंसंट्रेटर से दी जा रही ऑक्सजीन
हरदोई। नवजात बच्चों के लिए महिला अस्पताल में बने एसएनसीयू वार्ड में भी बच्चों को कंसंट्रेटर से ही ऑक्सीजन दी जा रही है। एसएनसीयू वार्ड में 12 बेडों के सापेक्ष 11 कंसंट्रेटर मौजूद हैं। आवश्यकता पड़ने पर कंसंट्रेटर मंगा लिए जाते हैं। बताया कि करीब तीन माह से पाइप लाइनों में ऑक्सीजन नहीं आ रही है। इसलिए कंसंट्रेटर से ही ऑक्सीजन दी जा रही है।
अभियंता आए पर सही न कर पाए
ऑक्सीजन प्लांट दुरुस्त करने के लिए कई बार अभियंताओं को बुलवाया गया। अभियंताओं ने प्रयास भी किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। ऑक्सीजन प्लांट का रख रखाव सही ढंग से न होने और साफ-सफाई न कराए जाने के कारण प्लांट कबाड़ में तब्दील हो गए। अभियंताओं ने कंपनी के कर्मचारियों को बुलाकर बारीकी से सफाई कराने के लिए कहा था, लेकिन कर्मचारी आए ही नहीं।
एमपीडब्ल्यू कर्मियों के भरोसे प्लांट की जिम्मेदारी
हरदोई। महिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट संयंत्रों के रखरखाव की जिम्मेदारी एमपीडब्ल्यू (बहुउद्देशीय कार्यकर्ता) कर्मियों को दी गई है। जिनको सिर्फ प्लांट में ऑक्सीजन सप्लाई को बंद करने और चालू करने के अलावा कुछ भी नहीं आता। एमपीडब्ल्यू कर्मी ने बताया कि उनसे ऑक्सीजन सप्लाई को खोलने और बंद करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा संयंत्र में क्या है और क्या करना है उन्हें न तो पता है और न ही वह कर सकते हैं। अगर कोई गड़बड़ी होती है तो वह अधिकारियों को बता देते हैं।
महिला अस्पताल में संयंत्रों की सफाई और दोबारा चालू करने के लिए कंपनी के कर्मचारियों को को बुला लिया गया है। संयंत्र के अलावा अस्पताल में करीब 25 से 30 कंसंट्रेटर हर वक्त उपलब्ध रहते हैं। आवश्यकता पर उनका इस्तेमाल किया जाता है। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई,
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज