फोटो-01- मेडिकल कॉलेज में स्थित डायलिसिस सेंटर। संवाद
डायलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को तारीख देकर वापस भेजा जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा तो है, लेकिन आए दिन कुछ मशीनें तकनीकी खराबी से बंद रहती हैं। इन दिनों दस मशीनों में दो खराब हैं। मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। हाल यह है कि डायलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को तारीख देकर वापस भेजा जा रहा है।
मेडिकल काॅलेज में डायलिसिस यूनिट की स्थापना पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर वर्ष 2022 में शुरू की गई थी। शुरूआत के समय ही यहां दस मशीनें लगाई गई थीं। डायलिसिस सेंटर शुरू होने पर न सिर्फ जिले के बल्कि आस पास के जनपदों के मरीज भी यहां डायलिसिस के लिए आने लगे। यहां सुविधा न होने पर मरीजों काे लखनऊ, कानपुर और बरेली जैसे जनपदों की दौड़ लगानी होती थी।
औसतन हर रोज 40 मरीज यहां डायलिसिस के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से 27 से 30 मरीजों की ही डायलिसिस हो पाती है। मौजूदा समय में डायलिसिस के लिए 130 मरीज वेटिंग लिस्ट में हैं। वहीं मशीनें भी खराब होती जा रहीं हैं। इस समय यूनिट में सिर्फ आठ मशीनें काम कर रहीं है और दो मशीनें खराब हो गई हैं।
एक मशीन की बैटरी में समस्या आ गई है जबकि दूसरी मशीन के तार कट जाने से काम नहीं कर पा रही है। डायलिसिस सेंटर के मैनेजर आयुष यादव ने बताया कि मशीनों में आ रही समस्या को दूर करने के लिए अभियंता को पत्र भेजा जा चुका है। सेंटर पर बेड और मशीन और बेड बढ़ाने का प्रस्ताव भी मंजूर हो गया है। अप्रैल तक कुछ हद तक प्रतीक्षा सूची को कम लिया जाएगा।
इंजीनियर के इंतजार में मशीनें बंद
डायलिसिस होने में करीब चार घंटे लगते हैं। सुबह नौ बजे से रात के दस बजे तक प्रत्येक बेड पर तीन डायलिसिस हो पा रहीं हैं। इस कारण से एक बार फिर से सेंटर पर मशीन खराब हो गई है। बीते कई दिनों से अब सेंटर पर 8 मशीनों से ही डायलिसिस हो रही है। हालांकि सेंटर प्रभारी आयुष यादव ने मशीन को सही कराने के लिए इंजीनियर को बुला लिया है लेकिन अभी तक नहीं पहुंचा है।