हरदोई। मेडिकल कॉलेज की एक्सरे की व्यवस्था में अभी भी सुधार नहीं हुआ है। मरीजों को एक्सरे कराने के लिए घंटों इंतजार के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। पोर्टेबल मशीन से सीमित एक्सरे होने की वजह से मरीज को भले ही परेशानी आज है, लेकिन एक्सरे दूसरे दिन हो पाता है। अधिक जरूरतमंद को निजी पैथोलाॅजी से एक्सरे कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाएं लाख कोशिशों के बावजूद जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते बदहाल हैं। मरीजों की सहूलियत के लिए लगाई गई डिजिटल एक्सरे मशीन का कोई पुरसाहाल नहीं है। अधिक क्षमता वाली पोर्टेबल मशीन भी खराब होने के बाद से जस की तस है। वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे बीते डेढ़ माह से एक्सरे किए जा रहे हैं। इमरजेंसी की पोर्टेबल मशीन से दिन भर में 60 से 70 एक्सरे हो पाते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में रोजाना 200 से 250 मरीज एक्सरे कराने आते हैं।
इनमें ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी के मरीज शामिल होते हैं। आईपीडी और इमरजेंसी के मरीजों को वरीयता दी जाती है, लेकिन ओपीडी में आने वाले मरीजों को मौका मिलने पर ही एक्सरे होता है। इससे कई मरीजों का उसी दिन एक्सरे भी नहीं हो पाता है। उन्हें दूसरे दिन आने के लिए वापस कर दिया जाता है। कुछ तो निजी पैथोलॉजी से एक्सरे करा लेते हैं तो कुछ दूसरे दिन फिर से नंबर लगाते हैं।
आठ बजे से नंबर लगाने के बाद भी नहीं हो पाता एक्सरे
हरदोई। एक्सरे कक्ष के बाहर सुबह आठ बजे से ही लाइन लग जाती है, लेकिन इसके बाद भी कई लोगों को बिना एक्सरे के लौटना पड़ता है। पुलिस लाइन के पीछे चंदीपुरवा निवासी अयान को अंगुली का एक्सरे कराना था, लेकिन बाद वाले पर्चे के एक्सरे हो गए, लेकिन उसका एक्सरे नहीं हो सका। दोपहर को करीब एक बजे उन्हें बिना एक्सरे कराए लौटना पड़ा। इसी प्रकार टड़ियावां के गांव भैंसरी के श्याम किशोर भी अपने पैर का एक्सरे कराने आए। सुबह आने के बाद भी उनका एक्सरे नहीं हो सका और अब वह निजी पैथोलॉजी में एक्सरे कराने चले गए।
मरीजों के एक्सरे हो पाने की समस्या के बारे में जानकारी है, इसलिए एक्सरे की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही लोगों को एक्सरे की बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय