पिहानी। क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने बाघ ने शुक्रवार रात सात किमी का सफर तय करने के बाद ठिकाना बदल दिया। हसैयामऊ के खेतों से निकल कर बाघ ने पांच किमी उत्तर और फिर दो किमी पश्चिम तक गया। वन विभाग के अधिकारियों ने पंजों के निशान देखकर बाघ का नया ठिकाना करौंधी गांव के पास खेत बताया है।
वन रेंज अधिकारी शीतला प्रसाद ने बताया कि वन दारोगा विजय शंकर शुक्ला, कन्हैया लाल वर्मा, वन रक्षक राहुल व विपिन आदि ने शुक्रवार रात इसी इलाके में डेरा डाले रखा।
टीम के अनुसार बाघ धीरे-धीरे गोमती नदी की ओर बढ़ रहा है। रात में बाघ ने अपना ठिकाना बदलकर गोमती नदी की ओर उत्तर पश्चिम का तकरीबन सात किमी सफर तय किया और महोलिया व करौंधी गांव होकर फतेहचंद के सरसों के खेत से होकर गन्ने के खेत में चला गया। यहां से गोमती और धोबिया आश्रम का जंगल महज चंद किमी दूर है। टीम के मुताबिक बाघ के रुख को भांपकर पिंजड़ा अब गोमती नदी के आसपास लगाने पर विचार किया जा रहा है।
शिकार के प्रमाण नहीं मिले
बाघ के चौथे दिन भी कोई भी शिकार किए जाने का प्रमाण नहीं मिला है। वन विभाग ने धोबिया, कुल्हावर, जरेली, खटेली, आदि गांवों के लोगों से पशुओं को अंदर बांधने की सलाह दी है। रात में आहट होने पर आग जलाने की सलाह दी है। जानकारों की मानें तो बाघ शीघ्र ही कोई शिकार कर सकता है।
पिंजड़ा पीछे तो बाघ आगे-आगे
बाघ को पकड़ने की कोशिश में वन विभाग की टीम पिंजड़ा तो जरूर ले आई लेकिन इसे सही जगह नहीं लगाए जाने से बाघ अब तक आजाद घूम रहा है। स्थिति यह है पिंजड़ा पीछे है तो बाघ इसके आगे-आगे चल रहा है। शुक्रवार को हसैयामऊ में जैसे ही पिंजड़ा लगा, इसी रात बाघ ने पिंजड़े के बजाय उत्तर रुख कर सात किमी दूर जाकर नया ठिकाना बना लिया। बाघ को पिंजड़े तक लाने के लिए वन विभाग को दो कदम आगे चलना होगा।