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Hardoi News: पूर्व ब्लॉक प्रमुख के साढृू की हत्या में तीन को आजीवन कारावास

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हरदोई। पूर्व ब्लॉक प्रमुख के साढू की 18 साल पहले हुई हत्या में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया गया। अपर जिला जज कोर्ट संख्या-तीन योगेंद्र चौहान ने तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर कुल 87 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की आधी रकम मृतक के आश्रितों को देने के आदेश भी अपर जिला जज ने दिए। जुर्माना न देने पर अभियुक्तों को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के गोवर्धनपुर निवासी पिंटू ने नौ मार्च 2008 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उनके चचेरे भाई विजय सिंह उर्फ पप्पू (टड़ियावां के पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेश सिंह के साढू) गांव के ही भाऊ सिंह, भन्ना सिंह, स्पोर्ट्स सिंह (सगे भाई) ने अपने साथियों कल्लू सिंह और प्रमोद उर्फ गुड्डू के साथ मिलकर आठ मार्च की रात विजय सिंह के मकान के बाहर तमंचा और बंदूक लेकर आ गए थे। मकान के बाहर बैठे विजय सिंह को रंजिश में गोलियां मार दी थीं। गोली लगने से विजय वहीं गिर गए थे। शोर सुनकर आए परिजन विजय को हरदोई अस्पताल लाए। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया।
लखनऊ में नौ मार्च को विजय की मौत हो गई। पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। अब पुलिस ने भाऊ सिंह, भन्ना सिंह, स्पोर्ट्स सिंह और कल्लू को 12 मार्च 2008 को प्रतापनगर चौराहे से गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर तमंचा और बंदूक भी बरामद कर ली थी। विवेचना के दौरान प्रमोद का नाम पुलिस ने निकाल दिया था और बाकी चारों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रमोद को भी तलब कर लिया था।
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अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश करने के साथ ही आठ अभिलेखीय साक्ष्य भी न्यायालय के सामने प्रस्तुत किए गए। अभियुक्तों की तरफ से दो सफाई साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान दो आरोपी भाऊ सिंह और भन्ना सिंह की मौत हो गई। पत्रावली पर मौजूद सबूतों और तर्कों को सुनने के बाद अपर जिला जज योगेंद्र चौहान ने स्पोर्ट्स सिंह, कल्लू और प्रमोद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।





पुलिस ने जिसका निकाला था नाम, अदालत ने उसे भी सुनाई सजा
मृतक विजय सिंह उर्फ पप्पू के चचेरे भाई पिंटू की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था। इनमें तीन सगे भाई भाऊ सिंह, भन्ना सिंह और स्पोर्ट्स सिंह के साथ गांव के ही प्रमोद कुमार और कल्लू भी शामिल थे। पुलिस ने सात जून 2008 को आरोप पत्र दाखिल किया था। इसमें प्रमोद कुमार का नाम निकालते हुए क्लीनचिट दे दी थी। सुनवाई के दौरान पिंटू के प्रार्थना पत्र पर चार जून 2012 को न्यायालय ने प्रमोद को तलब कर लिया था। इसके बाद प्रमोद के खिलाफ भी सुनवाई शुरू हो गई थी। सुनवाई पूरी होने पर प्रमोद को सजा भी हुई। मतलब यह कि पुलिस ने जिसे क्लीनचिट दी थी उसे अब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।




ताबड़तोड़ फायरिंग से दहल गया था गांव
आठ मार्च 2008 को घटना के दौरान तमंचा और बंदूक से हुई फायरिंग से दहशत फैल गई थी। फायरिंग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतक विजय के शरीर पर सात छर्रे लगे थे और उनके 18 टांके लगाए गए थे। इसके अलावा घटनास्थल पर जांच करने गई पुलिस को भी दीवार में सात छर्रे लगे मिले थे।
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