ओपीडी के बाहर कुर्सियों पर बैठे मरीज।
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जिला अस्पताल की पैथोलाजी में सोमवार को फिर जांच कराने वालों में तीन को डेंगू की पुष्टि हुई। जिले में डेंगू के रोगियों की संख्या 48 पहुंच गई है। डेंगू की पुष्टि होने के बाद भी जिला अस्पताल में अलग से बनाए गए वार्ड में रोगी भर्ती करने में सकुचा रहा है। अब तक एक भी डेंगू रोगी वार्ड में भर्ती नहीं किया गया है। जिले में अब तक डेंगू के डंक से 16 की जान जा चुकी है। जिले में डेंगू के रोगियों की संख्या बढ़ने का सिलसिला जारी है।
सोमवार को जिला अस्पताल की पैथोलाजी में डेंगू के लक्षण मिलने पर 10 लोगाें की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में शहर के मोहल्ला वैटगंज निवासी सीए सक्सेना (52), बिलग्राम कोतवाली में तैनात एसएसआई एमपी सिंह (45) तथा शहर निवासी सरिता गौतम (10) क ो डेंगू की पुष्टि हुई। डेंगू की पुष्टि होने के बाद भी रोगियों को वार्ड में भर्ती नहीं किया गया। जबकि, पैथोलाजी में रिपोर्ट पाजिटिव आने पर डेंगू की पुष्टि के लिए नमूना लखनऊ स्थित राज्य संचारी लैब भेजी जाती है।
राज्य संचारी लैब से जांच रिपोर्ट कम से कम सात दिन बाद जिले पर भेजी जाती है। नियमानुसार रोगी की जब तक फाइन रिपोर्ट नहीं मिलती, उसे अलग-वार्ड में भर्ती किया जाना चाहिए। वजह डेंगू के रोगी क ो यदि कोई मच्छर काटता है तो उसके डंक में लार्वा पहुुंच जाता है। ऐसे में यदि मच्छर किसी दूसरे व्यक्ति को काटता है, तो संबंधित व्यक्ति के भी डेंगू की चपेट में आने संभावना रहती है।
इसके लिए जिला अस्पताल के आई वार्ड में अलग से डेंगू वार्ड बनाया गया है। यहां पर रोगियों क ो भर्ती करने के लिए मच्छरदानी आदि की भी व्यवस्था है। यह वार्ड अगस्त में बनाया गया था, जिसमें 20 बेड हैं। लेकिन इस वार्ड में 17 अक्टूबर तक डेंगू का कोई रोगी भर्ती नहीं किया गया है। जिला अस्पताल की पैथोलाजी में अभी तक हुई डेंगू की जांच में 16 की रिपोर्ट पाजिटिव आई। जिले में अब तक डेंगू के रोगियों की संख्या 48 पहुंच गई है। इसमें से 16 की डेंगू से मौत हो चुकी है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. आरके मिश्र ने बताया कि डेंगू के रोगियों को भर्ती करने के लिए अलग से वार्ड बना है। जिला अस्पताल की पैथोलाजी में खून की जांच में जिन लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आती है। उनको स्वेच्छा से यहां पर भर्ती किया जाता है। जिन लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आई उनमें से रोगियों के तीमारदारों ने भर्ती नहीं कराया। निजी अस्पतालों में इलाज कराने की बात कहकर रोगी को साथ ले गए हैं।