हरदोई। लोक अदालत का आयोजन शनिवार को दीवानी न्यायालय परिसर में किया गया। शुभारंभ प्रशासनिक न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सुलह समझौते के आधार पर ज्यादा से ज्यादा मामलों का निस्तारण कराने के लिए हर तीन माह पर लोक अदालत का आयोजन होता है। सबके सहयोग से ही ज्यादा से ज्यादा मुकदमों का निस्तारण कराया जा सकता है।
लोक अदालत के दौरान छोटी-छोटी बातों को लेकर हुए पारिवारिक विवादों का निस्तारण कराया गया। इस तरह के 49 मामलों का निस्तारण लोक अदालत में हुआ। 22 मामलों में दंपती न्यायालय परिसर से एक साथ रहने के लिए विदा हुए। खास बात यह है कि पति पत्नी के बीच विवाद छोटी छोटी बातों के लिए हुए थे। कहीं पत्नी के मायके वालों से मोबाइल पर ज्यादा बात करने को लेकर विवाद था तो कहीं ससुरालीजनों से अलग रहने की जिद ने पत्नी को पति से अलग कर दिया था। ऐसे मामलों का निस्तारण कराते हुए परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश महेंद्र नाथ ने कहा कि यहां से विदा होकर जा रहे हो। अब खुशी-खुशी रहना। आपस में झगड़ना मत। झगड़े से जिंदगी बर्बाद होती है। बच्चों की जिंदगी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
केस 1
शहर के एक मोहल्ला निवासी शख्स ने विदाई का वाद दायर किया था। इसमें बताया था कि शादी 21 जून 2022 को हुई थी। पत्नी वर्ष 2024 से अपने मायके में रह रही थी। पति का कहना था कि पत्नी घरेलू काम नहीं करती थी। ज्यादातर समय मोबाइल पर अपने मायकेवालों से बात करती हैं। घरेलू काम के लिए कहने और मायके वालों से कम बातचीत की नसीहत देने पर पत्नी नाराज होकर मायके चली गई। लोक अदालत में पत्नी की विदाई पति के साथ करा दी गई। दोनों ने मिलकर रहने का भरोसा न्यायालय को दिलाया।
केस-2
उन्नाव जनपद की एक महिला की शादी टड़ियावां थाना क्षेत्र के एक गांव में वर्ष 2017 में हुई थी। महिला का आरोप था कि संतान न होने के कारण ससुरालीजन उसे परेशान करते थे। दहेज के लिए भी प्रताड़ित करते थे। अगस्त 2022 में ससुरालीजनों ने पिटाई कर घर से निकाल दिया था। तब से वह मायके में थी। न्यायालय में गुजारा भत्ते का वाद दर्ज कराया था। लोक अदालत में पति पत्नी को पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक संस्कारों के प्रति जागरूक किया गया। इसके बाद दोनों को यहीं से मिठाई खिलाकर एक साथ रहने के लिए विदा कर दिया गया।
केस-3
पिहानीनगर के एक शख्स ने न्यायालय में रुखसती (विदाई) का वाद दायर किया था। बताया था कि शहर के एक मोहल्ला निवासी महिला के साथ सितंबर 2022 में उसका निकाह हुआ था। वाद के मुताबिक पत्नी कहती थी कि हरदोई बड़ा शहर है। वह वहीं पली बढ़ी है। पिहानी छोटा सा नगर है। ससुरालीजनों से अलग हरदोई में रहने की जिद करती थी। इसकी वजह से दोनों के बीच कई बार विवाद हुआ। वर्ष 2024 से पति पत्नी अलग अलग रह रहे थे। लोक अदालत में दोनों को समझाया गया। शनिवार को दोनों को साथ में रहने के लिए राजी कर रवाना कर दिया गया।
बार और बेंच के जिम्मेदारी से काम करने से जिंदा रहेगा लोकतंत्र : प्रशासनिक न्यायमूर्ति
प्रशासनिक न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने शनिवार को बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी कक्ष में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बार और बेंच को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। दोनों जिम्मेदारी से काम करेंगे तो लोकतंत्र जिंदा रहेगा। उन्होंने कहा कि आज भी लोगों का सबसे ज्यादा भरोसा न्यायपालिका पर है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं से उन्होंने कहा कि कनिष्ठ अधिवक्ताओं को ज्यादा से ज्यादा सिखाने की कोशिश करें। आज के कनिष्ठ अधिवक्ताओं का भविष्य इसी पर निर्भर करता है कि वह आज कितना सीखते हैं। कहा कि आधुनिक तकनीकों के मामले में कनिष्ठ अधिवक्ता बेहतर हैं और इनसे वरिष्ठों को सीखना चाहिए। प्रशासनिक न्यायमूर्ति का इशारा इंटरनेट और साइबर क्राइम की तरफ था। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि हरदोई में एक ही बार है। एकता से न्याय प्रणाली बेहतर ढंग से संचालित होती है। यहां जिला जज रीता कौशिक, सीजेएम रिचा वर्मा, अपर जिला जज भूपेंद्र प्रताप भी मौजूद रहे। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेंद्र सिंह तोमर, मंत्री अनिल मिश्रा, सूरज पाल सिंह, उदयवीर भदौरिया, सतेंद्र सिंह, अजय द्विवेदी आदि मौजूद रहे।