हरदोई। मेडिकल काॅलेज के डायलिसिस सेंटर पर मरीजों की सहूलियत के लिए नई मशीनें भले ही आ चुकी हैं पर डायलिसिस के लिए मरीजों का इंतजार अभी खत्म नहीं हो पाया है। सेंटर पर जगह के अभाव की वजह से कई मशीनें के अभी तक कवर ही नहीं हटाए गए हैं। सेंटर पर जगह कम होने की वजह से मरीजों की प्रतीक्षा सूची जस की तस बनी हुई है।
जिले के मेडिकल कॉलेज में किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस सेंटर बना हुआ है। डायलिसिस सेंटर बन जाने से मरीजों को काफी राहत मिली है। मरीजों को दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ता है, साथ ही मेडिकल कॉलेज में निशुल्क डायलिसिस होती है। इस वजह से आने जाने से लेकर डायलिसिस का खर्चा भी लोगों का बच रहा है। मेडिकल काॅलेज में डायलिसिस यूनिट 10 मशीनों के साथ वर्ष 2022 में शुरू की गई। डायलिसिस सेंटर स्थापित होने के बाद से अभी तक 203 मरीजों का पंजीकरण हो चुका है और प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होने के बाद 10 मरीजों की प्रतीक्षा सूची बनी रहती है।
अधिक लोड होने की वजह से दो मशीनें खराब भी हो गईं। इसके बाद आठ मशीनों पर ही डायलिसिस हो रही है। इसी समस्या के निस्तारण के लिए सेंटर प्रभारी आयुष यादव ने छह नई मशीनें मंगवा ली है, लेकिन यह मशीनें अभी तक सेंटर पर लग नहीं पाई हैं। हालांकि, दो खराब मशीनों को हटाकर नई मशीन लगा दी गई हैं, लेकिन चार मशीनें अभी तक वैसे ही बंद रखी हैं। सेंटर पर स्थान की कमी के चलते मशीन अनुपयोगी साबित हो रही हैं। इससे मरीजों की प्रतीक्षा सूची में भी कुछ खास कमी नहीं आई है।
सेंटर प्रभारी आयुष यादव ने बताया कि मशीनों की उपलब्धता है और दो खराब मशीनों को हटाकर दूसरी मशीन लगा दी गई है। मरीजों का लोड अभी कम है, लेकिन स्थान के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखा गया है।