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Hardoi News: मशीन पढ़ेगी लाभार्थी का चेहरा, फिर मिलेगा पोषाहार

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हरदोई। बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन पात्रों को वितरित होने वाले पोषाहार में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। अब लाभार्थियों को फेस रिकॉग्नाइजेशन (चेहरे से पहचान) करने के बाद ही पोषाहार दिया जाएगा। फेस रिकॉग्नाइजेशन के लिए आंगनबाड़ी कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए बाल विकास पुष्टाहार विभाग कार्यक्रम तैयार कर रहा है।
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बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन गर्भवती धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। इसके साथ ही छह माह से तीन साल आयु वर्ग के और तीन वर्ष से छह साल आयु वर्ग के बच्चों को भी पोषाहार दिया जाता है। सभी के लिए पोषाहार की मात्रा अलग-अलग है। पोषाहार के तौर पर चने की दाल, दलिया और रिफाइंड तेल भी दिया जाता है। आमतौर पर पोषाहार न मिलने की शिकायतें अधिकारियों के पास आती रहती थीं।
इस कारण पोषण ट्रैकर एप लांच किया गया था। इस पर पोषाहार वितरण का ब्योरा रहता है। योजना में और अधिक पारदर्शिता लाने के उद्ददेश्य से फेस रिकॉग्नाइजेशन के जरिए ही लाभार्थियों को पोषाहार वितरित किए जाने की योजना तैयार की गई है। पोषण ट्रेकर एप पर ही फेस रिकॉग्नाइजेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। जब मशीन लाभार्थी के चेहरे को पढ़ लेगी और पात्र पाएगी तभी उसे पोषाहार का वितरण किया जाएगा। इसका इस्तेमाल सिखाने के लिए आंगनबाड़ी कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा।
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वर्जन

फेस रिकॉग्नाइजेशन के जरिए पोषाहार वितरित कराने का निर्णय लिया गया है। पारदर्शिता बढ़ाने और हर पात्र को पोषाहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऐसा किया जा रहा है। आंगनबाड़ी कर्मियों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। -मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जनपद में इतने हैं पोषाहार के लाभार्थी
-74,312 गर्भवती और धात्री महिलाएं।
-2,25,964 छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे।

-85,000 तीन वर्ष से छह वर्ष तक के बच्चे।
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