हरदोई। ब्लॉक शाहाबाद, भरखनी और हरपालपुर में आने वाले जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के वार्डों में परिवर्तन होगा।
नगरीय निकाय के सीमा विस्तार के बाद शासन ने पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कराई है। साल 2021 में हुए पंचायत चुनाव के बाद नगरीय निकायों के सीमा विस्तार में ब्लॉक शाहाबाद की 13 ग्राम पंचायतें नगर पालिका शाहाबाद और ब्लॉक भरखनी की एक ग्राम पंचायत नगर पंचायत पाली में शामिल हो गई है। इससे इन ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के वार्डों से निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने-अपने पदों पर काम कर रहे हैं।
शासन ने पंचायतों के साल 2026 में होने वाले चुनाव से पहले पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया दी है। शासन ने पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी कराते हुए पांच जून तक प्रस्ताव भी पंचायतीराज निदेशालय को उपलब्ध कराने की समय सीमा दी है। साल 2021 के पंचायत चुनाव के बाद नगरीय निकायों के चुनाव से पहले नगरीय निकायों के सीमा विस्तार हुए थे। इसमें नगर पंचायत शाहाबाद में ब्लॉक शाहाबाद में आने वाली 13 ग्राम पंचायत पूरी तरह से शामिल हो गई थीं। उन ग्राम पंचायतों का अस्तित्व भी अधिसूचना प्रकाशन के साथ ही समाप्त हो गया। उस समय निर्वाचित प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों का कार्यकाल भी समाप्त हो गया था, लेकिन जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के वार्डों से निर्वाचित जनप्रतिनिधि पद पर काम कर रहे हैं।
वार्डों का नए सिरे से होगा परिसीमन और क्षेत्र व आरक्षण में होगा बदलाव
पंचायतों के पुनर्गठन में शाहाबाद, भरखनी में जिला पंचायत के वार्डों का नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा। इससे वार्डों में परिवर्तन तय है। वार्डों में परिवर्तन से आरक्षण भी प्रभावित होगा। ऐसे ही भरखनी में होने वाले परिसीमन से हरपालपुर के वार्ड भी प्रभावित होंगे। 25 सदस्य क्षेत्र पंचायत के वार्ड पर जिला पंचायत का एक वार्ड का गठन किया जाता है।
शाहाबाद में कम हो जाएंगे बीडीसी सदस्य
नगरीय निकाय के सीमा विस्तार में ब्लॉक शाहाबाद की 13 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हुआ है। उस समय करीब 26,000 से अधिक आबादी नगरीय निकाय में शामिल हो गई है। साल 2021 में पंचायत के हुए चुनाव में शाहाबाद में बीडीसी सदस्य के 92 वार्ड और भरखनी में 102 वार्ड थे। चुनाव के बाद हुए क्षेत्र पंचायत के वार्ड भी प्रभावित हुए हैं। पंचायतों के पुनर्गठन में शाहाबाद की 13 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त होने से क्षेत्र पंचायत के वार्ड भी कम हो जाएंगे, जिससे बीडीसी सदस्य भी कम होंगे।