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Hardoi News: हालात के मारों को मार डालता है सिस्टम... शव लेकर दर-दर भटकने की मजबूरी

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फोटो-21-मौलाना उसमान गनी मजाहिरी। संवाद
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हरदोई। किस्मत का खेल कहें या फिर बुरा वक्त, जिस पर बीतती है, दर्द का अहसास भी उसी को होता है। हालात के मारों को हरदोई में सिस्टम फिर से मार डालता है।
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मामला शवों के एक्सरे और पोस्टमार्टम से जुड़ा हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन कोई रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं है। ऐसे में गोली मारकर हत्या किए जाने या खुदकुशी कर लेने के मामलों में परेशान परिजनों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। एक्सरे कराने के लिए शव सीतापुर भेजा जाता है। ऐसा नहीं है कि हरदोई में एक्सरे मशीन नहीं है। मशीन है लेकिन यहां रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। इसी वजह से शव सीतापुर भेजे जाते हैं। ऐसे मामलों में शव का अंतिम संस्कार होने में तीन से चार दिन लग जाते हैं। घटना से परेशान परिजन इस दौरान और भी ज्यादा दर्द महसूस करते हैं।


केस-1
हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के करता गांव में 22 अक्तूबर की सुबह सुरेंद्र यादव का शव चारपाई पर पड़ा मिला। वह अविवाहित थे। भाइयों ने घटना की वजह और हालात पर आशंका जताई। पुलिस ने शव कब्जे में लिया। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा तो तय हुआ कि शव का एक्सरे कराया जाए। 23 अक्तूबर को शव का एक्सरे सीतापुर में हुआ। 24 अक्तूबर को पोस्टमार्टम हुआ। शव घर पहुंचते-पहुंचते सूर्यास्त हो गया। 25 अक्तूबर को अंतिम संस्कार हो सका।
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केस-2
बीती 31 अगस्त को पाली थानाक्षेत्र के अलियापुर में गोली लगने से मानवी की मौत हो गई थी। पहले मामला खुदकुशी का बताया गया, बाद में घटना ऑनर किलिंग की निकली। 31 अगस्त को मौत होने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए हरदोई भेजा गया। यहां से शव एक्सरे कराने के लिए सीतापुर भेजा गया। तीसरे दिन पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार हो पाया।


केस-3
बीते सोमवार को हरियावां थाना क्षेत्र के पीलामहुआ निवासी रणजीत ने तमंचे से गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। शव पोस्टमार्टम के लिए हरदोई लाया गया। यहां शव का एक्सरे कराने की हिदायत दी गई। शव सीतापुर भेजा गया। मंगलवार को एक्सरे कराकर शव वापस हरदोई लाया गया। यहां पोस्टमार्टम हुआ। बुधवार को रणजीत का अंतिम संस्कार हो पाया।



सीएमओ के अधीन डॉ. अरुण कुमार रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात थे। 10 जनवरी 2025 को शासन ने उनका तबादला हमीरपुर कर दिया था। हरदोई में जिनकी तैनाती उनकी जगह पर हुई थी, वह आए नहीं और बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी को भी नमस्ते कह दिया। तब से सीएमओ के अधीन एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। रेडियाेलॉजिस्ट न होने के कारण रोजमर्रा के कामों में भी परेशानियां आती हैं।



स्थायी चिकित्सक को ही है मेडिकल करने का अधिकार
यूं तो मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है लेकिन वह संविदा पर हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि मेडिकल करने का अधिकार सिर्फ स्थायी चिकित्सक को ही है। एक्सरे तो कोई भी चिकित्सक करा सकता है या मदद कर सकता है लेकिन इसकी वैधानिक रिपोर्ट रेडियोलॉजिस्ट को ही बनानी होती है।




मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर यह है मान्यता
मय्यत की तदफीन (अंत्येष्टि) करने में बिना किसी उचित कारण के देरी करना शरीअत में नापसंद किया गया है। नबी ए करीम हजरत मोहम्मद स. ने फरमाया था, ‘मय्यत की तदफीन में जल्दी करो।’ अगर कोई शरई या जरूरी वजह हो तो थोड़ी देर करना जायज है लेकिन बेवजह देरी करना मरने वाले की रूह को तकलीफ देता है और सुन्नत के खिलाफ है। -मौलाना उसमान गनी मजाहिरी, इमाम ईदगाह व मस्जिद इस्लामगंज, पिहानी






तीन प्रहर के अंदर हो जाना चाहिए शव का अंतिम संस्कार
हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु व उसके उपरांत के संस्कार व विधान बताए गए हैं। शास्त्र के अनुसार मृत्यु के तीन प्रहर यानी कि 8-10 घंटे के अंदर शव का अंतिम संस्कार कर लिया जाना चाहिए। उसकी वजह शव को अधिक देर तक रखने से वह दूषित होने लगता है। साथ ही मृत्यु के उपरांत के संस्कार भी समय से तय हो जाते हैं। -आचार्य सनत्कुमार मिश्रा
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जनपद में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। पूर्व में छह मई 2025 को तत्कालीन सीएमओ ने इस बारे में शासन को पत्र भी भेजा था। हालांकि, रेडियोलॉजिस्ट की कमी पूरे प्रदेश में है। एक बार फिर वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर रेडियोलॉजिस्ट तैनात किए जाने का अनुरोध किया जाएगा। -डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमओ

फोटो-21-मौलाना उसमान गनी मजाहिरी। संवाद

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