हरदोई। अब गांवों में सामग्री आपूर्ति के नाम पर फर्जी फर्में भुगतान नहीं करा पाएंगी। जिम्मेदार भी फर्जी फर्मों के नाम से भुगतान नहीं निकाल पाएंगे। पंचायतीराज विभाग ने कर चोरी रोकने और वास्तिवक फर्मों को ही भुगतान किए जाने के लिए ग्राम पंचायतों की जीएसटी विभाग में पंजीयन अनिवार्य किया गया है। जीएसटीएन ग्राम पंचायतों को आवंटित होने से सामग्री आदि की खरीदारी के भुगतान के समय ही जीएसटी की कटौती करनी होगी।
पंचायतीराज विभाग ने भुगतान में मनमानी और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मनमाने बिल-वाउचर फीड किए जाने के खुलासे के बाद सभी ग्राम पंचायतों को जीएसटीएन आवंटित कराए जाने का निर्णय लिया। जिले में सभी 1,293 ग्राम पंचायतों के साथ ही क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत को जीएसटीएन पंजीयन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्राम पंचायतों में जीएसटीएन आवंटन के लिए पंचायतीराज विभाग ने पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी है। जीएसटीएन होने से अब बिना सामग्री आपूर्ति किए ही फर्में भुगतान नहीं ले पाएंगी। जीएसटीएन पंजीयन होने से अब पंचायतीराज विभाग के माध्यम से मिलने वाले राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग के साथ ही खुद की आमदनी के रुपये से भुगतान के समय ही सामग्री के अनुसार जीएसटी की कटौती करनी होगी।
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जीएसटी विभाग के समन्वय से लगाया गया शिविर
ग्राम पंचायतों के जीएसटी विभाग में पंजीयन के लिए बुधवार को पंचायतीराज विभाग ने जीएसटी विभाग के समन्वय से विभाग में शिविर लगाया। जीएसटी विभाग में लगाए गए शिविर में बुधवार को करीब 300 ग्राम पंचायतों का जीएसटी विभाग में पंजीयन किया गया। उन ग्राम पंचायतों को जीएसटीएन आवंटित किए गए।
ग्राम पंचातयों को जीएसटीएन आवंटन होने से अब सामग्री पर तय दर के अनुसार भुगतान के समय जीएसटी की कटौती किया जाना अनिवार्य हो जाएगा। जिससे राज्य सरकार को कर के रूप में बड़ी मात्रा में रुपये मिलेंगे और कर की चोरी पर अंकुश लगेगा। जीएसटीएन होने से ग्राम पंचायतें फर्जी फर्मों को भुगतान भी नहीं कर पाएंगी। फर्म को भुगतान करने पर जीएसटी कटौती होते ही जीएसटी विभाग को फर्म की जानकारी हो जाएगी।
-विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ