जेठ माह माह में धूप की तपिश और लू के थपेड़ों ने
जहां लोगों को बेहाल कर दिया है, वहीं तालाबों के बाद अब सई नदी सूखने की
कगार पर पहुंचने लगी है। सनचान कोट स्थिल पुल के नीचे थोड़ा बहुत पानी भरा
हुआ है, जिसे आसपास के जानवर पी रहे हैं।
क्षेत्रीय बाशिंदों की मानें
तो गौसगंज से पड़ोसी जिले उन्नाव की सीमा तक करीब एक सैकड़ा गांव नदी
किनारे बसें हैं। नदी के सूखने से इस क्षेत्र में खेतों की सिंचाई की
समस्या भी गहराती जा रही है। ज्ञात हो कि दो दिन पहले अधिकतम पारा 44
डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था, जो गुरुवार को 41 डिग्री सेल्सियस पर आ
गया है।
पर गर्म हवाओं के थपेड़ों से लोग बेहाल हैं। गर्मी के चलते
सवायजपुर क्षेत्र से लेकर संडीला तहसील क्षेत्र तक अधिकांश तालाब सूख गए
हैं, वहीं अब गौसगंज से कासिमपुर होती हुई उन्नाव जाने वाली सई नदी में
पानी का बहाव खत्म होकर गड्ढों में थोड़ा बहुत पानी भरा हुआ है।
जिससे इस
नदी किनारे बसे गांवों में खेतों की सिंचाई के लिए किसान भी चिंतित नजर आ
रहे हैं। इस बाबत किसानों का कहना है कि ऐसे में खरीफ की फसल में अगले
माह धान की बुआई करने में समस्या आ सकती है। अबकी नदी में पानी न होने से
सिंचाई का संकट किसानों को झेलना पड़ सकता है।
नेवादा के ग्राम प्रधान
रामआसरे, जरौली के सुधीर द्विवेदी, शाहपुर के ग्राम प्रधान राजेश वर्मा व
नन्हाख्ेाड़ा के प्रधान बाबूलाल वर्मा और नदी किनारे बसे आश्रम के संचालक
मनमदन शाह का कहना है कि करीब 10 साल बाद नदी सूखने की कगार पर है, जो
क्षेत्र के लिए ठीक है। इससे किसानों के अलावा पशु-पक्षी भी पानी के लिए
परेशान होेंगे।