हरदोई। होली पर होलिका दहन मुख्य परंपरा है। कभी लकड़ी और उपलों आदि से ऊंची-ऊंची होलिका बनाई जाती थी अब समय के साथ लकड़ी की कीमतों में बढ़ोतरी ने इनकी ऊंचाई घटा दी है। महंगाई से परंपरा निभाने तक ही सीमित होती जा रही है। शहर से लेकर गांवों तक की होलिका की ऊंचाई घटी है। जिले में 3,777 स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा।
होली पर होलिका दहन को लेकर पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पारंपरिक रूप से घरों में गाय के गोबर के बल्ले और उपले आदि बनाए जाने लगते हैं। गांवों में आपसी सहयोग से लकड़ी का इंतजाम किया जाता है। शहरों में लोग आर्थिक रूप से सहयोग करते हैं और होलिका दहन की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग लकड़ी, उपला आदि की व्यवस्था बाजार से कराते हैं। लकड़ी की आसमान छूती कीमतों के कारण इस साल होलिका की ऊंचाई में कमी देखी जा रही है। पिछले कुछ साल की तुलना में लकड़ी महंगी हुई है।
वहीं, होलिका दहन के लिए लकड़ी और उपले आदि की व्यवस्था जुटाने वाले लोगों के मुताबिक, लकड़ी की कीमतें बढ़ी हैं। वहीं, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता से भी होलिका में लकड़ी का उपयोग कम किया गया है। लकड़ी ठेकेदार गुड्डू और राजिक ने बताया कि लकड़ी 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही है। लकड़ी के सूखी होने की स्थिति के अनुसार भाव कम और अधिक होते रहते हैं। पहले होलिका दहन के लिए लोग पांच से सात क्विंटल लकड़ी लेते थे जबकि अब दो से तीन क्विंटल लकड़ी से ही काम चला रहे हैं।
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गो-काष्ठ बचाएगी शहर की हवा, लोगों से उपयोग का आह्वान
पर्यावरण संरक्षण को लेकर एनजीटी वैसे भी अभियान चला रहा है। वहीं, लकड़ी के अधिक उपयोग से पेड़ों का कटान होता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से होलिका दहन के लिए गो-काष्ठ के उपयोग का आह्वान किया है। जिलाधिकारी अनुनय झा ने लोगों को होली की शुभकामनाएं दीं और कहा कि होलिका दहन में पशु आश्रयस्थलों में बनाए जा रहे गो-काष्ठ को उपयोग में लाएं। इनकी कीमत भी कम है और गो-काष्ठ की बिक्री से पशु आश्रयस्थलों की आमदनी भी बढेगी और पर्यावरण संरक्षण भी होगा। लकड़ी के कम उपयोग से हजारों पेड़ों का जीवन भी सुरक्षित रहेगा। जितनी अधिक हरियाली रहेगी वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा भी उतनी अधिक और अच्छी होगी।
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होलिका दहन दो मार्च सोमवार की रात होगा : आचार्य सनत्कुमार मिश्र
होलिका दहन को लेकर संशय नहीं है। आचार्य सनत्कुमार मिश्र ने बताया कि प्रमुख पंचांगों के आधार पर दो मार्च सोमवार को होलिका दहन होगा। पंचांग में तीन मुहूर्त बताए गए हैं। इसमें सोमवार को प्रदोषकाल सूर्यास्त के सायं 5:46 बजे से 8:10 बजे तक, दूसरा मुहूर्त रात 11:53 से 12:50 बजे तक और तीसरा मुहूर्त रात 2:04 बजे से सुबह 4:04 बजे तक रहेगा। रंग खेलने का कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता लेकिन होलिका विभूति धारण करने का मुहूर्त चार मार्च को रहेगा। बताया कि भारतीय समयानुसार, तीन मार्च को चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक रहेगा। चंद्रग्रहण की अवधि तीन घंटे 28 मिनट होगी। इससे तीन मार्च को सुबह 6:20 बजे से शाम 6:48 बजे तक सूतक काल रहेगा।
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सूतक काल में रंग खेला जा सकता : शास्त्री उमाकांत अवस्थी
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि होलिका दहन सोमवार दो मार्च को ही तीन मार्च की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में होगा। सुबह की बेला में होली में आखत डाले जा सकते हैं। होली तापी जा सकती है। शाम को 7:00 बजे के बाद होली मिलन किया जा सकता है। रंगोत्सव ग्रहण के सूतक काल में किया जा सकता है लेकिन ग्रहण काल में रंग खेलना उचित नहीं है। ग्रहण 3:20 से प्रारंभ होगा इससे पहले सूतक काल में रंग खेला जा सकता है। ग्रहण काल 3:20 से 6:50 बजे तक रहेगा। इस दौरान खान-पान वर्जित रहेगा।
फोटो 24 : डीएम अनुनय झा। स्रोत : विभाग
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