हरदोई। घर में घुसकर छेड़छाड़ के आरोपी देवर को सिविल जज जूनियर डिवीजन (एफटीसी महिला) लवलेश कुमार ने क्लीन चिट दे दी है। उसके खिलाफ दाखिल किया गया पुलिस का आरोप पत्र न्यायालय की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। दरअसल, पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में कहा था कि वह कानूनी कार्रवाई नहीं चाहती हैं। बावजूद इसके पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
मामला पचदेवरा थाना क्षेत्र के एक गांव का है। यहां की रहने वाली महिला ने पांच अक्तूबर 2021 को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें अपने सगे देवर पर आरोप लगाया था। आरोप था कि देवर ने पति की गैरमौजूदगी में घर में घुसकर छेड़छाड़ की। महिला ने पुलिस के सामने दिए बयान (सीआरपीसी की धारा 161) में आरोपों को दोहराया था। इसके बाद जब बयान के लिए महिला को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो महिला आरोपों से मुकर गई।
महिला का कहना था कि आरोपी और उसके बीच देवर भाभी का रिश्ता है। देवर मजाक कर रहा था और इसलिए कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहती है। पुलिस ने महिला के इन बयानों को दरकिनार करते हुए आरोपी देवर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इस कारण आरोपी को उच्च न्यायालय से जमानत करानी पड़ी। बीते 19 सितंबर को आरोपी ने न्यायालय के समक्ष डिस्चार्ज (उन्मोचित) किए जाने का प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इसमें बताया कि मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए महिला के बयान को दरकिनार करते हुए पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया। आरोपों से मुक्त करने की याचना की और कहा कि उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं बनता है। सिविल जज लवलेश कुमार ने उसे आरोप मुक्त कर दिया।
फैसले में जज ने की यह टिप्पणी
पूरे मामले में आरोपी के आचरण में किसी भी प्रकार की दुर्भावना, अनैतिक उद्देश्य व अश्लील कृत्य का कोई तत्व दिखाई नहीं देता है। कानून का यह सिद्धांत है कि अभियोजन की सभी सामग्री का मूल्यांकन करते हुए यदि यह तथ्य सामने आए कि आरोपी के खिलाफ कोई आरोप नहीं बनते हैं तो न्यायालय का दायित्व है कि आरोपी को अनावश्यक रूप से अभियोजन की प्रक्रिया में न उलझाया जाए।