हरदोई। तकरीबन तीन साल पहले मामा की नौ साल की बेटी से दुष्कर्म के आरोपी को अंतिम सांस तक जेल में रहना होगा। अपर जिला जज (विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह ने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी किया। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति पीड़िता को देने का आदेश दिया। जुर्माना न देने पर तीन साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
पाली थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी शख्स ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 15 जुलाई 2023 की रात उसका भांजा शाहजहांपुर जनपद के आल्हागंज थाना क्षेत्र के मऊ गांव निवासी रामू शराब के नशे में घर आया था। रात में खाना खाकर घर के आंगन में छप्पर के नीचे चारपाई पर लेट गया था। रामू के पड़ोस में ही वह अपने बेटे के साथ सोया था। कुछ ही दूरी पर चारपाई पर उसकी बेटी (9) सो रही थी। आधीरात के बाद लगभग ढाई बजे उसकी नींद खुली तो देखा कि रामू उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म कर रहा था।
इस दौरान बेटी का मुंह दबा लिया था। उसने यूपी 112 पर घटना की जानकारी दी और रामू को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। मासूम को एंबुलेंस से पाली पीएचसी में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने रामू के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे जेल भेजा था। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को पेश करने के साथ ही 12 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। विशेष लोक अभियोजक ने आरोपी को सख्त सजा दिलाए जाने की मांग की। अपर जिला जज ने मामले की सुनवाई पूरी कर अभियुक्त को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई।
पैरवी के लिए नहीं मिला था वकील, चीफ डिफेंस काउंसिल ने रखा पक्ष
मामा की मासूम बेटी से दुष्कर्म की घटना सुर्खियां बन गई थीं। हर कोई आरोपी पर लानत-मलानत कर रहा था। हाल यह हुआ कि आरोपी को न्यायालय में पैरवी करने के लिए कोई वकील तक नहीं मिला। इसके बाद विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिये चीफ डिफेंस काउंसिल ने उसका पक्ष न्यायालय के सामने रखा।
शरीर और मन को पहुंचाया आघात, विश्वास भी तोड़ा
फैसला सुनाते समय अपर जिला जज मनमोहन सिंह ने सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अभियुक्त ने अल्पायु बालिका के साथ घृणित अपराध कर न सिर्फ उसके शरीर और मन को आघात पहुंचाया बल्कि परिवार के विश्वास को भी तोड़ा। ऐसे गंभीर और घृणित अपराधों में कड़ी सजा देना आवश्यक है ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे और ऐसे अपराध करने वालों में भय उत्पन्न हो।