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मतदान से पीछे नहीं रही जिले की जनता

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हरदोई। भक्त प्रहलाद की नगरी हरदोई की जनता ने विधानसभा चुनाव में सात बार प्रत्याशियों को 50 फीसदी से ज्यादा वोट देकर अपने समर्थन का इजहार किया। खास बात तो यह रही कि लगातार जीत पर जीत हासिल करने वाले महारथी भी इस प्यार को बरकरार नहीं रख पाए।
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1962 के चुनाव में शाहाबाद विधानसभा सीट से प्यारेलाल को 50.93 फीसदी जनता ने खुलकर समर्थन दिया था, लेकिन अगले ही चुनाव में उन्हें हार का मुंह भी देखना पड़ा था।
इसी चुनाव में गोड़वा सीट (अब संडीला विधानसभा) से मोहनलाल वर्मा को जनता ने 54.93 फीसदी मत देकर अपने समर्थन का इजहार किया था, लेकिन अगली बार वह भी 13.55 फीसदी वोट पर सिमट कर रह गए थे।
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1985 में अहिरोरी से परमाई लाल ने 56.81 फीसदी वोट हासिल कर जनता के दिलों पर राज किया था। इसी चुनाव में पिहानी से अशोक वाजपेयी को 51.27 फीसदी के साथ एकतरफा समर्थन मिला था।
उन्होंने कांग्रेस की कमला देवी को 29.43 फीसदी के अंतर से करारी शिकस्त दी थी। 2007 में हरदोई सदर विधानसभा सीट से नरेश अग्रवाल को जनता ने 55.57 फीसदी वोट देकर खुलकर समर्थन दिया था।
इसी चुनाव में बावन से राजेश्वरी को 50.38 फीसदी वोट मिले थे। 2012 में नितिन अग्रवाल को 54.60 फीसदी मत देकर हरदोई सदर की जनता ने खुला समर्थन देकर इतिहास दोहराया था।
साख और काम को साबित करने की रहेगी चुनौती
विधानसभा चुनाव में अबकी मतदाताओं की खामोशी से चुनावी अखाड़े में उतरे दिग्गजों को साख और काम को साबित करने की चुनौती है। सात विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायक ही मैदान में हैं।
पांच साल में कराए गए विकास कार्यों और जातीय समीकरण के बलबूते ही उनकी नैया पार हो सकेगी। 40 वर्षों से हरदोई सदर की सीट पर एक छत्र राज करने वाले अग्रवाल परिवार के नितिन अग्रवाल चौथी बार चुनावी अखाड़े में हैं।
यहां सपा से पूर्व विधायक अनिल वर्मा पासी-मुस्लिम वोटों के सहारे नैया पार लगाने की जुगत में हैं। बसपा के शोभित पाठक जाटव व ब्राह्मण वोट साधने में जुटे हैं।
पूर्व राज्यमंत्री रामपाल वर्मा पर अपनी साख और काम को साबित करने की चुनौती है। शाहाबाद में चुनाव लड़ रहीं तीन बार की विधायक रजनी तिवारी को पूर्व विधायक आसिफ खां कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
भितरघात का सामना करने के साथ ही उन पर बाहरी होने का ठप्पा लगने से चुनाव दिलचस्प हो गया है। गोपामऊ व सांडी में पासी बिरादरी के बड़े नेता रहे परमाई लाल, झम्मन लाल और कुबेर के परिवारों की तलवारें आपस में टकरा रही हैं।
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