हरदोई। भीषण गर्मी, तेज धूप और बढ़ती उमस का असर अब लोगों की त्वचा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तापमान और नमी बढ़ने के साथ ही त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में इन दिनों त्वचा रोगियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार पसीना आने और शरीर में नमी बने रहने से फंगल संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
तापमान में बढ़ोतरी और उमस के ग्राफ चढ़ते ही त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भारी उछाल आया है। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी और उमस के मौसम में शरीर के ऐसे हिस्से, जहां अधिक पसीना आता है, वहां संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। साफ-सफाई में लापरवाही, लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना और धूप में अधिक देर तक रहने से त्वचा संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों में इसका असर अधिक देखा जा रहा है।
मेडिकल काॅलेज के चर्म रोग विभाग के डॉक्टर डॉ. प्रफुल्ल कुमार वर्मा ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 250 से 300 के करीब मरीज आ रहे हैं।इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की रही जो घमौरियां, फंगल संक्रमण, खुजली, त्वचा एलर्जी और तेज धूप से होने वाले इंफ्रारेड बर्न जैसी समस्याओं से परेशान होकर इलाज कराने पहुंचे। चिकित्सकों ने लोगों को दोपहर के समय तेज धूप में निकलने से बचने, सूती व ढीले कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने और शरीर को साफ व सूखा रखने की सलाह दी है। साथ ही बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी क्रीम या दवा का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी है।
इन बीमारियाें ने बढ़ाई चिंता
- फंगल संक्रमण : गीले कपड़े पहनने या शरीर में लंबे समय तक पसीना जमा रहने के कारण जांघों, अंडर आर्म्स और उंगलियों के बीच फंगल तेजी से पनप रहा है।
- घमौरियां : लगातार पसीना आने और त्वचा के रोमछिद्र बंद होने के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लाल दाने और खुजली से परेशान हैं।
- त्वचा एलर्जी व सनबर्न : तेज धूप के सीधे संपर्क में आने से चेहरे और हाथों की त्वचा लाल हो रही है और उसमें जलन की शिकायत आ रही है।
ऐसे करें बचाव
- दोपहर 12 से 3 बजे तक तेज धूप में निकलने से बचें।
- पसीना आने पर शरीर को साफ और सूखा रखें।
- सूती व हल्के रंग के कपड़े पहनें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ का सेवन करें।
- त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या संक्रमण होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
- रसदार फलों का सेवन बढ़ाएं